दूध से ज्यादा बढ़ सकती है गोमूत्र की मांग?

नई दिल्ली(18 जुलाई): 8 साल ने 6 साल के बच्चे को माराअनिंदय उपाध्याय अल्युमिनियम का एक बड़ा सा कटोरा हाथ में लिए सुशीला कुमारी शेल्टर में बंधी करीब दो दर्जन गायों के पीछे जाती हैं और गोमूत्र एकत्र करती हैं। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक गोशाला चलाने वाले सुशीला कुमारी के मालिक गोमूत्र की एक भी बूंद बर्बाद नहीं होने देना चाहते, इसलिए उन्होंने सुशीला को यह काम सौंप रखा है। सुशीला और दो अन्य नौकर दिन भर में करीब 15 से 20 लीटर गोमूत्र एकत्र करते हैं। इसकी वजह यह है कि भारत के हिंदू समाज में पवित्र मानी जाने वाली देशी गायों के मूत्र की मांग इन दिनों काफी बढ़ गई है। फिलहाल यह एक हॉट कमोडिटी है और इसकी सेल दूध से भी ज्यादा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। 

इसकी वजह पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से गायों के संरक्षण की पहल है। मोदी सरकार ने बीते दो सालों में 5.8 अरब रुपये की रकम गोशालाओं पर खर्च की है। बांग्लादेश को होने वाली गोवंश की अवैध तस्करी पर रोक लगाने और बीफ एवं गोहत्या पर बैन लगाए जाने के फैसलों से लोग इसमें कारोबार की संभावनाएं देखने लगे हैं। 

घरेलू दवा है गोमूत्र नागपुर स्थित गो-विज्ञान अनुसंधान केंद्र के चीफ कॉर्डिनेटर सुनील मानसिंहका का कहते हैं, 'गोमूत्र के जरिए घर में ही करीब 30 दवाएं तैयार की जा सकती हैं।' सुनील कहते हैं कि हम इस 'अमृत' को देश के हर नागरिक तक पहुंचाना चाहते हैं। इसी तरह बुलंदशहर की गोशाला में काम करने वाली सुशीला कुमारी इस बात का ख्याल रखती हैं कि गोमूत्र बेकार न जाए और वह उसे एकत्र कर लें।