इतिहास रचने वाली इस हॉकी टीम के 7 खिलाड़ियों के पिता है ड्राइवर

नई दिल्ली (18 दिसंबर): यह बात एकदम सच है कि अगर आपके कुछ भी करने की ठान लेते हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको शिकस्त नहीं दे सकती। ऐसी ही कुछ कहानी है भारतीय जूनियर हॉकी टीम के उन 7 खिलाड़‍ियों की, जिनके बारे में न्यूज 24 आपको रूबरू कराएगा।

15 साल बाद जूनियर हॉकी वर्ल्‍ड कप के फाइनल में पहुंचने वाली इस भारतीय टीम में 7 ऐसे (हरजीत सिंह, विकास दहिया, कृष्‍ण बहादुर पाठक, हरमनप्रीत सिंह, वरुण कुमार, सुमित कुमार और अजीत कुमार पांडे) सितारे हैं, जिनके पिता पेशे से ड्राइवर हैं।

फॉरवर्ड अजीत कुमार:

अजीत के पिता जय प्रकाश स्‍थानीय कारोबारी तेज बहादुर सिंह के यहां काम करते थे। उत्‍तर प्रदेश के गाजीपुर में रहने वाले तेज बहादुर खेलों के शौकीन हैं। इसलिए उन्‍होंने एक स्‍कूल में हॉकी एकेडमी शुरू की। इसके लिए उन्‍होंने आर्टिफिशियल टर्फ बनवाया और हॉकी स्टिक भी मुहैया कराईं। अजीत ने बताया, ”एक ट्रिप के दौरान भैया (तेजबहादुर) ने मेरे पिता से कहा कि मुझे हॉकी एकेडमी से जुड़ना चाहिए। अगली सुबह मैं हॉकी पिच पर दौड़ लगा रहा था।

स्‍टार ड्रेग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह:

हरमनप्रीत सिंह एक बच्‍चे के रूप में हरमनप्रीत ट्रेक्‍टर के दीवाने थे। वे पिता के साथ बैठकर इसे चलाया करते थे, लेकिन गियर बदलने में उन्‍हें काफी परेशानी होती थी। उन्‍होंने बताया, ”मेरे पिता मुझे बताया करते थे कि ट्रेक्‍टर कैसे चलाते हैं, गियर बदलने की प्रकिया सबसे कठिन थी।” समय बदलने के साथ वे यह ट्रिक सीख गए, लेकिन इससे उनके कंधे और बाजू मजबूत हो गए।”

डिफेंडर वरुण कुमार:

वरुण कुमार के पिता ब्रह्मानंद पंजाब में मेटाडोर 407 चलाते हैं।

गोलकीपर विकास दहिया:

विकास दहिया के पिता दलबीर सोनीपत में प्राइवेट फर्म में ड्राइवर हैं।

बैक अप गोलकीपर कृष्‍ण बहादुर पाठक:

कृष्‍ण बहादुर के पिता टेक बहादुर क्रेन ऑपरेटर थे। उनका इसी साल निधन हो गया।

मिडफील्‍डर सुमित कुमार:

सुमित कुमार के पिता रामजी प्रसाद वाराणसी में ड्राइवर हैं।