महिला विश्व कप: इतिहास रचने से एक कदम दूर भारतीय टीम

नई दिल्ली ( 22 जुलाई ): आईसीसी महिला विश्व कप के पिछले संस्करण में भारतीय टीम सातवें स्थान पर रही थी, लेकिन इस बार इतिहास ने अपने आप को दोहराया और साल 2005 की तरह भारतीय महिलाओं ने विश्व कप के फाइनल में कदम रख दिया है। अब रविवार को उसका सामना मेजबान इंग्लैंड से 'क्रिकेट का मक्का' कहे जाने वाले लॉर्ड्स मैदान पर होगा। 

मिताली राज की अगुआई वाली भारतीय टीम ने अब तक बेहतरनी प्रदर्शन किया है और टीम ने सेमीफाइनल में छह बार के चैंपियन आस्ट्रेलिया को 36 रन से हराकर सबको अपनी क्षमता दिखा दी है। भारतीय टीम अब चाहेगी कि उसे टूर्नामेंट में अपनी कड़ी मेहनत का सुखद फल मिले। महिला विश्व कप में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2005 में रहा जब टीम फाइनल में पहुंची लेकिन आस्ट्रेलिया से हार गई। अब कल होने वाला मैच ऐसा लम्हा साबित हो सकता है जो महिला क्रिकेट को लेकर भारत में सभी समीकरण बदल दे।

भारतीय पुरुष टीम ने भी 1983 में लॉर्ड्स में ही वेस्टइंडीज की अजेय मानी जाने वाली टीम को हराकर अपना पहला विश्व कप जीता था और इसके बाद धीरे धीरे दुनिया में क्रिकेट और इस खेल की वित्तीय ताकत बना। रविवार के मैच में जीत महिला क्रिकेट में भी इस तरह का बदलाव लाने की क्षमता रखती है। भारतीय टीम ने दूसरी बार खिताबी मुकाबले में जगह बनाई है। मिताली और झूलन गोस्वामी 2005 में उप विजेता टीम का हिस्सा थे और कल संभवत: उनके पास विश्व चैंपियन बनने का अंतिम मौका होगा।

मिताली ने कहा,‘‘मेरे लिए और झूलन के लिए यह काफी विशेष है क्योंकि 2005 टूर्नामेंट में खेलने वाली हम ही दो खिलाड़ी हैं जो अब भी टीम के साथ हैं और हमारे लिए यह 2005 में पहुंचने की तरह है.।’

भारत अगर कल खिताब जीत लेता है तो वह ऐसा करने वाली चौथी टीम बनेगा। महिला विश्व कप में अब तक सभी खिताब इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की झोली में गए हैं। खिताबी मुकाबले तक के सफर के दौरान टीम को सामूहिक प्रदर्शन का फायदा मिला जिसमें मिताली ने मोर्चे से अगुआई की।