लाहौर में ऐतिहासिक जैन मंदिर तोड़ा, हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी

नई दिल्ली (12 फरवरी): पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अधिकारियों ने लाहौर में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए एक सदी पुराने जैन मंदिर को ध्वस्त कर दिया है। यह मंदिर लाहौर में विवादित मैट्रो लाइन प्रोजेक्ट को रास्ता देने के लिए ध्वस्त किया गया है।

अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए पंजाब सरकार ने गुरुवार को पहले से ही क्षतिग्रस्त मंदिर के बचे ढांचे को ध्वस्त कर दिया। गौरतलब है, हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक महत्व की इमारतों के 200 फीट हिस्से में हर तरह के काम को सस्पैंड करने का आदेश दिया था। 

(Photo Credit : Shiraj Hasan Twitter Account)

पुराने शहर के प्रसिद्ध अनारकली बाज़ार के पास स्थित इस जैन मंदिर को 1992 में भारत में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के बाद नुकसान पहुंचाया गया था। इस मंदिर को गुरुवार को पूरी तरह ध्वस्त किए जाने से पहले कुछ व्यापारिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, जैसे दुकानें, लाहौर वेस्ट मैनेजमेंट कम्पनी (एलडब्ल्यूएमसी) का दफ्तर और एक निजी फिलिंग स्टेशन। इस कदम के पीछे शाहबाज़ शरीफ सरकार का हाथ है।

सुप्रीम कोर्ट लाहौर के रजिस्ट्री ब्रांच, शालीमार गार्डन, चौबुर्जी स्मारक, संत एंड्रयू चर्च, जीपीओ बिल्डिंग, मेहरूनिसा का मकबरा, बुधू का अवा, बाबा मौज दरिया का मकबरा, शाह चेराग बिल्डिंग, अवन-ए-औकाफैंद और दाई अंगा मकबरा जैसे दूसरे ऐतिहासिक स्थल हैं, जो प्रोजेक्ट के रास्ते में पड़ते हैं।

लाहौर हाईकोर्ट ने जनवरी में मेट्रो लाइन प्रोजक्ट के खिलाफ इसके रास्ते में पड़ने वाले ऐतिहासिक इमारतों के 200 फीट में कन्सट्रक्शन वर्क पर स्टे ऑर्डर जारी किया था।  

विपक्षी पार्टियों ने पंजाब असेंबली में ना केवल सरकार के ऐतिहासिक स्थलों को ध्वस्त करने के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, बल्कि शरीफ भाइयों (शाहबाज और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ) के खिलाफ विरोध में एक अभियान भी चालू किया। उन्होंने इन्हें ''ऐतिहासिक स्थलों और सार्वजनिक सम्पत्तियों की बिल्कुल भी देखभाल ना करने वाला बिल्डर्स'' भी कहा।

कार्यकर्ता कमल मुमताज़ ने लाहौर हाईकोर्ट में गुहार लगाई। उन्होंने सरकार के खिलाफ कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने और मैट्रो लाइन पर कन्सट्रक्शन वर्क के लगातार जारी रहने पर 'कन्टैंप्ट पिटीशन' दायर की है। उन्होंने कोर्ट से हस्तक्षेप करने की मांग की है। साथ ही सरकार को ऐतिहासिक स्थलों को ध्वस्त करने से रोकने के लिए भी कहा है।

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने पंजाब सरकार को भी इस प्रोजेक्ट पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है। साथ ही लोगों के उनकी विरासत को संजोकर रखने के मौलिक अधिकार पर हमला करने से परहेज करने के लिए कहा है।