पाक-बांग्लादेश के हिंदुओं को आसानी से मिल सकेगी भारतीय नागरिकता!

नई दिल्ली (3 जून) :  धार्मिक भेदभाव की वजह से पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर देश में आने वाले अल्पसंख्यकों को राहत देने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। गृह मंत्रालय ने नागरिकता क़ानून में संशोधन का मसौदा तैयार कर लिया है। अगर संसद इस मसौदे को पारित कर देती है तो धार्मिक भेदभाव की वजह से पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर आने वाले अल्पसंख्यकों को 'अवैध प्रवासी'  कहे जाने से छुटकारा मिल जाएगा। इस कदम से पाकिस्तान और बांग्लादेश के दो लाख हिंदुओं को फायदा होगा।  

नागरिकता कानून, 1955 में प्रस्तावित बदलाव भारत में रह रहे ऐसे शरणार्थियों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। इससे उन्हें भारत की नागरिकता के लिए दावा करने का क़ानूनी रास्ता मिल जाएगा। पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदूओं की अक्सर ये शिकायत रहती है कि उनके साथ वहां दोयम दर्जे के नागरिकों जैसा बर्ताव होता है। उनके साथ जहां हिंसा और अपहरण की आशंका बनी रहती है। वहीं उन्हें ईशनिंदा क़ानून के जाल में भी फंसने का डर रहता है।   

बता दें कि मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद ऐसे शरणार्थियों के लिए कई कदम उठाएं हैं। इन्हें लंबी अवधि का वीजा दिया जा रहा है ताकि वे नागरिकता पाने तक यहां रह सकें। सरकार लंबी अवधि के वीज़ा पर भारत में रह रहे शरणार्थियों को आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड जारी करने पर विचार कर रही है।