यूनिवर्सिटी के मॉड्यूल में बताया, 'गंदे रहते थे हिंदू, इस्लाम ने ही सिखाया शिष्टाचार'

कुआलालंपुर (14 जून): मलेशिया के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय ने अपने एक अध्यापन मॉड्यूल में भारत में हिंदुओं को ‘अस्वच्छ एवं गंदा’ बताया है। इसके बाद इस मुस्लिम बहुल देश में विवाद खड़ा हो गया है और अल्पसंख्यक समुदाय में आक्रोश फैल गया है।

यूनिवर्सिटी टेक्नोलोजी मलेशिया (यूटीएम) के इस मॉड्यूल के स्लाइडों को ऑनलाइन पोस्ट करने के बाद विवाद खड़ा हो गया। इन स्लाइडों में दावा किया गया है कि हिंदू अपने शरीर के मैल को निर्वाण प्राप्त करने के अपने धार्मिक कर्म का हिस्सा मानते हैं। उपशिक्षा मंत्री पी कमलनाथन द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद विश्वविद्यालय ने कहा कि वह इस मॉड्यूल की समीक्षा करेगा।

भारतीय मूल के कमलनाथन ने फेसबुक पर पोस्ट किया कि मैंने यूटीएम के कुलपति से बात की है और उन्होंने इस भूल को स्वीकार कर लिया है। मलय मेल ऑनलाइन ने आज खबर दी कि इस मॉड्यूल में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। अधिकारी इस सुझाव से पूरी तरह सहमत थे कि यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी भूल दोबारा न हो। मुस्लिम बहुल मलेशिया की 2.8 करोड़ की जनसंख्या में 60 फीसदी मलय हैं जो पूरी तरह मुसलमान हैं। 25 फीसदी चीनी हैं जो ईसाई और बौद्ध हैं। आठ फीसदी जातीय भारतीय हैं जिनमें ज्यादातर हिंदू हैं।

इस मॉड्यूल में यह भी दावा किया गया है कि इस्लाम ने ही भारत में हिंदुओं के जीवन में शिष्टाचार शुरू किया। सिख धर्म की उत्पति के अध्यापन पर केंद्रित एक अन्य स्लाइड में दावा किया गया है कि इस धर्म के संस्थापक गुरु नानक की इस्लाम के बारे में मामूली समझ थी और उन्होंने सिख पंथ की स्थापना करने में इसे आसपास की हिंदू शैली के साथ मिला लिया।