गरीब हिंदु लड़की की शादी में मुस्लिम ने की मदद

नई दिल्ली (18 अप्रैल): धर्म का काम तोडना नहीं बल्कि जोड़ने होता है। ये बात वर्तमान समय में चल रहे माहौल में बेमानी सी लगती है, लेकिन देश में अभी भी कई ऐसे लोग है जो जात-समुदाय में विश्वास ना करते हुए सिर्फ इंसानियत की बात पर ही यकीन करते है। ऐसी ही एक अच्छी पहल का मामला हरदोई में सामने आया है, जहां एक बेहद गरीब परिवार के गांव की हिंदु लड़की के विवाह को अच्छे ढंग से संपन्न कराने में मुस्लिम युवक ने भूमिका निभाई।


शिवकली के पिता की मौत कुछ समय पहले हो चुकी है। घर में केवल मां और एक छोटा भाई है। ऐसे में उसकी शादी तय हो गई तो बरात के स्वागत सत्कार के लिए और सामान्य दहेज़ के लिए उसकी मां अपने खेत को बेच रही थी। लड़की की शादी के लिए छोटी सी जमीन के टुकड़े में से एक हिस्सा बेचने की जानकारी उसके एक सामाजिक संस्था राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संघ से जुड़े दूर के रिश्तेदार को हुई, जो इस संस्था के ब्लॉक अध्यक्ष है। उन्होंने अपनी संस्था के मुस्लिम पदाधिकारी फ़िरोज़ अहमद को बताया तो फ़िरोज़ ने आगे बढ़कर उन लोगों की मदद करने का फैसला किया, जिसके बाद सब लोगों ने मिलकर इस शादी का पूरा खर्चा उठाने का फैसला किया। उसके बाद गांव में होने वाली शादी को संस्था के पदाधिकारी के घर से हुई। फर्रुखाबाद से बरात आई और पूरे विधि विधान से शादी की सारी रस्मे पूरी की गई।


बेटी के हाथ पीले करने के लिए खेत बेचने में लगी मां फिलहाल मुस्लिम युवक और अपने दूर के रिश्‍तेदार की दरियादिली से काफी प्रसन्न है। एक गरीब लड़की की शादी में पूरा सहयोग करने के बाद संस्था के पदाधिकारी भी खुश है। उन्होंने समय रहते एक मजबूर मां का लड़की के हाथ पीले करने के लिए खेत बिक्री से बचाया और साथ ही मदद करके समाज के मिसाल भी कायम की।