जहर बन चुका हैं इस नदी का पानी, लोगों को हो रहा है कैंसर

गौरव मिश्रा, शिव प्रकाश, वरुण सिन्हा, नई दिल्ली (29 अगस्त): देश की राजधानी दिल्ली के बगल में एक ऐसी नदी है, जिसमें पानी नहीं ज़हर बहता है। जिस नदी की हम बात कर रहे हैं वो है हिंडन। हिंडन यूपी के पांच शहरों से होकर गुज़रती है। कई गांव हिंडन के पानी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जो पानी कभी लोगों को ज़िंदगी देता था आज वो ही पानी उनकी ज़िंदगी को ख़तरे में डाल रहा है। ज़हरीले पानी के कारण लोगों को जानलेवा बीमारियां हो रही हैं।

हिंडन के डरवाने सच पर न्यूज 24 की पड़ताल...

कहते हैं कि हिंडन नदी 5 हज़ार साल पुरानी है। मान्यता है कि इस नदी की उत्पति पांडवों को कारण हुई। इसी नदी के पानी से पांडवों ने खांडवप्रस्थ को इंद्रप्रस्थ बना दिया। जिस नदी का पानी कभी लोगों की ज़िंदगी को खुशहाल करता था, आज उसी नदी का पानी लोगों की ज़िंदगी के लिए ख़तरा बन गया है। बीते 20 साल में हिंडन इस कदर प्रदूषित हुई कि उसका वजूद तो ख़तरे में पड़ा ही उसके किनारे बसे शहर और गांव भी संकट से गुज़र रहे हैं।

यहां पर हिंडन ने बरपाया है कहर...

हिंडन सहारनपुर, बागपत, मेरठ, मुज़फ़्फ़रनगर से होते हुए गाजियाबाद तक आती है। कई गांव ऐसे हैं जो हिंडन के प्रदूषित पानी का प्रकोप झेल रहे हैं। कुछ गांव की पहचान तो कैंसर गांव के तौर पर होने लगी है। पड़ताल के दौरान हम पहुंचे भगवानपुर गांव, जो हालात सामने थे उन्हें देखकर लगा कि ये गांव भगवान भरोसे ही है। यहां पानी लोगों को कतरा-कतरा मौत बांट रहा है। गांव के हर घर में कैंसर और त्वचा के रोगी मौजूद हैं।

अम्बेटा चांद, भनेडा, मिर्जापुर, महेशपुर, टपरी जैसे कई गांवो मे आलम यह है कि कैंसर से अभी तक 25 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं और त्वचा के रोग, एलर्जी आम बात हो गई है। जिला प्रशासन की टीमें आती है नमूने लेती है लेकिन कार्रवाई के नाम पर आज तक कुछ नहीं हुआ। गांव वाले काले रंग के हो चुके इसी पानी से खेती करते है। इसी में जानवर नहलाते है और इसी पानी को पीने के लिए मजबूर है। हिंडन नदी में शुगर मिल और अन्य औद्योगिक इकाइयों के केमिकल युक्त पानी के गिरने से आस-पास के भू-जल को भी प्रभावित किया है। यही वजह है कि इस गांव का भू-जल स्तर भी खतरनाक रूप से प्रदूषित हो चूका है।

सहारनपुर के बाद हमने रुख किया मेरठ का। हिंडन को यहां लोग काली नदी के नाम से पुकारने लगे हैं। पानी इस कदर प्रदूषित है कि लोगों के घरों में भी काला पीला पानी आता है। कुछ लोग तो बीमारी के डर की वजह से पलायन करने लगे हैं। प्रदूषित पानी की वजह से लोगों की त्वचा की बीमारी हो रही है। जयभीम नगर की ये महिला प्रदूषित पानी का दंश झेल रही है। शरीर पर जगह-जगह एलर्जी हो गई है।

यहां नीर फाउंडेशन नाम की संस्था लगातार रिसर्च कर रही है। फाउंडेशन का कहना है कि नदी में प्रदूषण का स्तर ख़तरनाक हो चुका है, जिसकी वजह से लोगों को जानलेवा बीमारियां हो रही हैं। फाउंडेशन का कहना है फैक्ट्रियों से निकला प्रदूषित पानी नदी के लिए ज़हर बन गया है। ऐसा नहीं है कि सरकार हालात से बेख़बर है। जब हमने स्वास्थ्य विभाग से इस विषय में बात की तो बताया गया कि सैंपल्स लिए गए हैं, आंकड़े जुटाए जा रहे हैं, लोगों का जागरुक करने के लिए कैंप लगाए जाते हैं।

मेरठ के बाद हमारा अगला पड़ाव था बागपत जिस गांव में हम पहुचे वहां कई लोगो को कैंसर हैं और कुछ लोगों की खराब पानी की वजह से मौत तक हो चुकी हैं। यहां पानी इतना ख़राब हैं कि हैंड पंप पर लाल निशान लगाया गया हैं। डॉक्टर लोगों को प्रदूषित पानी नहीं पीने की हिदायत देते हैं, लेकिन लोगों के पास कोई चारा नहीं है। हमारी इस पड़ताल के दौरान ये तो साफ हो गया है कि हिंडन के पानी उन शहरों और गांव के लिए प्रकोप बन चुका है जहां से ये गुज़रती है। लोगों को जह़रीले पानी से आगाह भी किया जाता है, लेकिन सवाल ये है कि अगर वो हिंडन के पानी का इस्तेमाल न करें तो काम कैसे चलाएं।