भारत के खिलाफ चीन कर रहा पाक की मदद, भारतीय सीमा पर बनाए बंकर और एयरबेस

नई दिल्ली ( 2 दिसंबर ): चीन अब पाकिस्तान के रास्ते भारत की घेराबंदी करने में लगा है। भारत-पाकिस्तान की सीमा पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी बढ़ती जा रही है। इसके लिए चीन भारत से लगती कश्मीर से गुजरात की सीमा पर एयरपोर्ट का जाल बिछा रहा है। चीनी सैनिकों का भारतीय सीमा के पास एयरपोर्ट बनाने की गति इतनी तेज है कि पिछले चार महीने में दो एयरपोर्ट बन चुके हैं और दो एयरपोर्ट बन रहे हैं।

पहला एयरपोर्ट राजस्थान की जैसलमेर के घोटारु सीमा के ठीक सामने 25 किलोमीटर की दूरी पर कदनवाली के खेरपुर में एयरबेस तैयार हो चुका है। यहां पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी कुछ महीनों में बढ़ी है। बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान ने इस एयरबेस पर मिग-21 के समकक्ष चीन से मिले चेनगुड जे-7 फाईटर विमान, जे.एफ-17 फाईटर विमान, वाई-8 रडार और कई अत्याधुनिक संसाधन उतार दिए हैं।  

- इसी तरह बाड़मेर के मुनाबाव के सामने थारपारकर में भी चीनी सैनिक एयरपोर्ट बना रहे हैं। इसकी दूरी भी भारतीय सीमा से करीब 25 किलोमीटर है। ये एयरपोर्ट फिलहाल निर्माणाधीन है।

- चीनी सैनिक केवल राजस्थान सीमा पर हीं नहीं गुजरात से लगती सीमा पर भी एयरपोर्ट तैयार कर रहे हैं। गुजरात के सीमा के सामने 20 किलोमीटर दूर मिठी में एक एयरपोर्ट बन रहा है।

- इसी तरह चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर के नाम पर रेल पटरियां बिछाने की योजना है, जिस पर काम चल रहा है।

खूफिया जानकारी के अनुसार जैसलमेर के सामने पाकिस्तान के पीरकमाल और चोलिस्तान में बड़ी संख्या में चीनी सैनिक देखे जा रहे हैं। वर्षों से विरान पड़े इस रेगिस्तान में चीन की दिलचस्पी बढ़ना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को हैरान करने वाला है। इसके अलावा ये भी जानकारी आई है कि पाकिस्तान के कराची, जकोकाबाद, क्वेटा, रावलपिंडी, सरगोडा, पेशावर, मेननवाली और रिशालपुर जैसे एयरबेस को चीनी सैनिक अत्याधुनिक बना रहे हैं और वहां पर चीनी सैनिक मौजूद हैं।

चीन केवल सामरिक ठिकाने ही नहीं तैनात कर रहा है, बल्कि बीकानेर से लेकर गुजरात की सीमा पर पाकिस्तान को पक्के बंकर बनाने में भी मदद कर रहा है।  रेत के टीलों में पक्के बंकर का निर्माण भी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए कान खड़े करने वाला है। अब तक 350 से ज्यादा बंकर चीनी मदद से पाकिस्तान तैयार कर चुका है। इन बंकरों को झाड़ियों के नीचे छुपाकर बनाया जा रहा है। साथ ही ऐसे पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे बंकर साफ-साफ नहीं दिखें।