इस यूनिवर्सिटी में छात्राओं के 'हिजाब डे' मनाने पर छिड़ गई बहस

नई दिल्ली (20 अप्रैल): पेरिस की एक शीर्ष यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स ने बुधवार को तब एक बहस छेड़ दी, जब उन्होंने अपने क्लासमेट्स से एक दिन के लिए हिज़ाब पहनने के लिए कहा। ऐसा उन्होंने फ्रांस में बड़े पैमाने पर विभाजनकारी अभ्यास मानी जाने वाली इस परंपरा के पीछे का रहस्य हटाने के लिए किया।

पाकिस्तानी अखबार 'द ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, साइंसेस पो के स्टूडेंट्स ने युवतियों से 'हिजाब डे' में शामिल होने के लिए कहा। उन्होंने कहा, "अगर आप भी सोचती हैं कि सभी महिलाओं को अपनी पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है और उनके चुनाव का सम्मान किया जाना चाहिए।"

फ्रांस में हुए आतंकी हमलों के बाद से देश में मुस्लिमों के खिलाफ कई तरह की "संदेह की स्थितियां" बनती जा रही हैं। स्टूडेंट्स के फेसबुक पेज पर कहा गया कि "जो लोग भी हिजाब पहनने के लिए तैयार होंगे वे जरूर फ्रांस में हिजाब पहनने वाली महिलाओं के खिलाफ मौजूद इस पूर्वाग्रह को महसूस कर पाएंगे।"

इस पेज पर प्रधानमंत्री मैनुअल वाल्स के खिलाफ भी लिखा गया था। उन्होंने इसी महीने की शुरुआत में कहा था कि हिजाब का इस्तेमाल एक राजनैतिक प्रतीक के रूप में "महिलाओं को स्लेव" बनाने के लिए किया जा जा रहा है। उनका बयान महिलाओं के अधिकारों की मंत्री के बयान के बाद आया था, जिसमें मंत्री ने हिजाब पहनने वाली महिलाओं की तुलना "दास प्रथा को स्वीकार करने वाले नीग्रोज़" के साथ भी की थी।

फ्रांस ने पूरे चेहरे को ढ़ंक कर रखने वाले हिजाब को सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंधित कर दिया है। पीएम ने कहा था कि इसका इस्तेमाल कुछ लोगों की तरफ से फ्रांस की सम्मानित सेकुलर सोसाइटी को चुनौती के तौर पर किया जा रहा है। साइंसेस पो इनीशिएटिव फ्रांस के ट्विटर पर सबसे ऊपर #HijabDay के नाम से ट्रेंड कर रहा था। जिसमें लोगों ने अपनी नाराजगी और प्रशंसा दोनों का ही इज़हार किया।

दक्षिणपंथी नेशनल फ्रंट के स्टूडेंट विंग ने एक फेसबुक पेज पर लिखकर कहा, "यह पहल घृणा पैदा करने वाली है। यह पारसी मध्यम वर्ग से निकलकर आई है जो सामाजिक सच्चाई से कटे हुए हैं।" उन्होंने कहा, "यह पहल घृणास्पद है क्योंकि दुनिया भर में जब महिलाएं अपनी बेड़ियां फेंकना चाहती हैं। उदाहरण के लिए ईरान में महिलाओं पर हिजाब ना पहनने पर एसिड तक फेंका जाता है।"

दार्शनिक और लेखक बर्नार्ड हेनरी लिवाई ने ट्वीट कर कहा, "साइंसेस पो में हिजाब डे। अब वहां शरिया डे कब होगा? फिर स्टोनिंग? स्लेवरी?" 

हालांकि, कैम्पस में फेमिनिस्ट ग्रुप पोलिटिकेलीस ने इस पहल का पूरी तरह से समर्थन किया है। उन्होने कहा, "वह जो कुछ भी पहनती हैं। चाहें मिनी स्कर्ट या हिजाब। महिलाएं हमेशा आलोचना का शिकार होती हैं। फेमिनिज़्म महिलाओं की वकालत के लिए महेशा एक समान होना चाहिए। जो उनके धर्म, जड़ों और समाजिक वर्ग से आज़ाद हो।" यूनिवर्सिटी ने ट्विटर पर पहल के बारे में बयान देने से खुद को अलग रखा है।