इस खिलाड़ी ने बनाए थे सबसे ज्यादा रन, नहीं पहना कभी टीम इंडिया की जर्सी

नई दिल्ली(: भारतीय क्रिकेट में आईपीएल के दस्तक देने से पहले रणजी ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट ही टीम इंडिया में एंट्री पाने का रास्ता हुआ करता थे। रणजी के अलावा अंडर-19 वर्ल्ड कप भी खिलाड़ियों को परखने का अच्छा प्लेटफॉर्म होता है। भारतीय क्रिकेट के कई दिग्गज खिलाड़ी रणजी में अपने प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया में एंट्री पाएं।

वहीं मौजूदा समय के कई खिलाड़ी आईपीएल में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया का कैप पहन चुके हैं। लेकिन आज हम एक ऐसी खिलाड़ी की बात करेंगे जो घरेलू क्रिकेट में कई रिकॉर्ड बनाए लेकिन इस बेहतरीन खिलाड़ी को टीम इंडिया का कैप पहनने का मौका नहीं मिला। इस खिलाड़ी का नाम है अमोल मजूमदार। अमोल घरेलू क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज है। भारतीय घरेलू क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में अमोल दूसरे नंबर पर हैं। उनसे ज्यादा रन उनके ही साथी खिलाड़ी वसीम जाफर ने ही बनाए।

हालांकि अमोल ने 2014 में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट को अलविदा कह दिया था। अमोल ने करीब दो दशक तक क्रिकेट खेला। दायें हाथ के 39 वर्षीय बल्लेबाज ने अपने घरेलू करियर की शुरूआत 1993-94 में मुंबई की तरफ से की। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 171 मैचों में 48.13 की औसत से 11,167 रन बनाये जिसमें 30 शतक शामिल हैं।रणजी क्रिकेट में 9000 रन बनाने वाले मजूमदार ने कई सत्र तक मुंबई की तरफ से खेलते रहे। उनकी अगुवाई में मुंबई की टीम ने 2006-07 में रणजी खिताब जीता था। बाद में वह आंध्र और असम की तरफ से भी रणजी मैचों में खेले।

उन्होंने मुंबई की तरफ से प्रथम श्रेणी में पदार्पण में भी प्रभाव छोड़ा। उन्होंने हरियाणा के खिलाफ रणजी प्री क्वार्टर फाइनल में 260 रन बनाये और उन्हें मुंबई की स्कूली क्रिकेट से उभरा एक और क्रिकेट सितारा कहा जाने लगा। यहां तक की उनको अगला सचिन तेंदुलकर भी कहा जाने लगा गया था। जब सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने शारदाश्रम स्कूल की तरफ से 664 रन की विश्व रिकार्ड साझेदारी निभाई थी तब अमोस मजूमदार पैड पहनकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। 

उन्हें 1994 में भारत अंडर-19 टीम का उप कप्तान बनाया गया और वह भारत ए की तरफ से सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ के साथ भी खेले थे। लेकिन घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें कभी राष्ट्रीय टीम में खेलने का मौका नहीं मिला।