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तमिलनाडु में चल रही हैं शरिया अदालतें, हाईकोर्ट का आदेश तुरंत करो बंद !

नई दिल्ली (20 दिसंबर):  मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु में मस्जिद परिसरों में चल रही शरियत अदालतों को बंद करने के आदेश के साथ ही राज्य सरकार को  चार सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश एसके कौल और न्यायमूर्ति सुंदर की  पीठ ने प्रवासी भारतीय अब्दुल रहमान की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि धार्मिक स्थलों को केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी जगहों पर अदालतें नहीं चलें। कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया। अब्दुल रहमान ने अपनी याचिका में कहा था कि शहर की एक मस्जिद में चल रही मक्का मस्जिद शरियत काउंसिल एक अदालत की तरह काम कर रही है। यह वैवाहिक विवादों को निपटाती है, सभी पक्षों को तलब करती है और तलाक के आदेश तक जारी करती है।

याचिकाकर्ता के वकील ए सिराजुद्दीन ने कहा कि यह याचिका उन निर्दोष मुसलमानों के हितों की रक्षा के लिए दायर की गई है जो शरिया अदालतों और काउंसिलों के कारण परेशान हैं। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल ने अपनी पत्नी के साथ दोबारा रहने के लिए शरियत अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उसे पत्नी को तलाक देने के लिए मजबूर किया गया जिसके बाद उसने हाई कोर्ट की शरण ली है।


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