वर्ल्ड बैंक की चिंता: कहीं पानी की किल्लत ना बन जाए दुनिया में जंग का सबब

नई दिल्ली (4 मई): मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव के चलते लगातार बढ़ रही पानी की समस्या पर गंभीरता से ध्यान देते हुए वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी दी है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि पानी की किल्लत से देशों की आर्थिक वृद्धि पर प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा स्थिति भयावह होने पर पलायन के तौर पर सामने आकर समस्या विश्व भर में जंग का मुद्दा बन सकती है। विश्व के अन्य इलाकों की तरह यह समस्या भारत में भी तेजी से बन रही है। 

वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट 'हाई एंड ड्राई: क्लाइमेट चेंज, वॉटर एंड इकॉनॉमी' मंगलवार को जारी की। इस मौके पर कहा कि बढ़ती जनसंख्या, बढ़ती आय और शहरों के विस्तार के संयुक्त प्रभाव से पानी की मांग अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है। जबकि, पानी की आपूर्ति और भी ज्यादा अनिश्चित और अनियमित हो गई है।

भारत में पानी के इस्तेमाल की तीव्रता को सुधारने की जरूरत बताते हुए वर्ल्ड बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि पानी की कमी में बढ़ोतरी होने वाली है। भारत में पानी की मांग भी लगातार बढ़ रही है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, भारत में औसत से कम बारिश होने पर सम्पत्ति को लेकर हिंसा 4 फीसदी बढ़ जाती है। इसके अलावा बाढ़ के नतीजों के तौर पर साम्प्रदायिक हिंसा के मामले भी बढ़ जाते हैं। 

गुजरात में, जब सिंचाई के लिए भूमिगत जल की उपलब्धता में कमी हुई या जब इसपर आधारित सिंचाई महंगी हुई तो किसानों का शहरों की तरफ पलायन बढ़ा। किसानों ने फसलों के क्रम में बदलाव या और असरदार सिंचाई की तकनीकों के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की बजाए पलायन को अपनाया।

वर्ल्ड बैंक के प्रेसीडेंट जिम यॉन्ग किम ने कहा, "पानी की किल्लत आर्थिक विकास और विश्व में स्थिरता के लिए एक अहम खतरा है। मौसम में बदलाव इस समस्या को और भी बदतर कर रहा है।"

उन्होंने कहा, "अगर देश जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए और बेहतर कदम नहीं उठाते। हमारा विश्लेषण दिखाता है कि बड़ी जनसंख्या वाले कई इलाके लंबे समय के लिए नकारात्मक आर्थिक वृद्धि का सामना कर रहे होंगे। लेकिन देश ऐसी नीतियां बना सकती हैं जो उन्हें पानी के अस्तित्व को लंबे समय के लिए बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।"

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