... तो 70 साल में पहली बार एक महिला बनेगी UN महासचिव?

नई दिल्ली (6 अप्रैल): संयुक्त राष्ट्र में महासचिव पद पर पहली बार किसी महिला की नियुक्ति हो सकती है। 70 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा होने की संभावना जताई जा रही है। बता दें, वर्तमान महासचिव बान की मून का कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है। 

बताया जा रहा है, न्यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क ने घोषणा की है कि वह इस सर्वोच्च पद के लिए दावेदारी पेश करेंगी। इस तरह उन्होंने पूर्वानुमानों पर विराम लगा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक आधिकारिक तौर पर जो उम्मीदवार सामने आए हैं, उनमें चार महिलाएं शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र में पहली महिला महासचिव को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके 193 सदस्यों में से अधिकांश का मानना है कि मौजूदा हालात को महिला बेहतर तरीके से काबू कर पाएगी। पूर्वी यूरोप से महिला उम्मीदवार को महासचिव बनाने की बात भी चल रही है, जिसे अब तक प्रतिनिधित्व हासिल नहीं हुआ है।

हेलेन क्लार्क

न्यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री। फिलहाल यूएन के विकास कार्यक्रम की प्रमुख। अपने अनुभव के आधार पर बान की मून की जगह लेने का दावा पेश कर रही हैं। इन्हें पूर्वी यूरोपियन ग्रुप की ओर उम्मीदवार बनाया गया है।

ईरीना बोकोवा

ईरीना बुल्गारिया की राजनेता और यूनेस्को की पहली महिला हेड और पूर्वी यूरोप की ओर से उम्मीदवार हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों का लंबा अनुभव है। यूनेस्को में रहते लिंग भेद, शिक्षा और आतंकमें फंडिंग के खिलाफ प्रभावी काम किया।

वेंस्ना पुसिक

वेंस्ना क्रोएशिया की पूर्व विदेश मंत्री और वर्तमान में संसद की डिप्टी स्पीकर हैं। देश की पहली उप प्रधानमंत्री भी रहीं। अपने खुले विचारों के लिए लोगों में ख्यात। लिंग भेद और एलजीबीटी राइट्स के खिलाफ भी आवाज उठा चुकी हैं।

नतालिया घरमैन

नतालिया मोल्दोवा की पूर्व विदेश मंत्री हैं। पिता मोल्दोवा के पहले राष्ट्रपति थे। देश की कार्यकारी प्रधानमंत्री के रूप में सेवा दे चुकी हैं। स्वीडन, नॉर्वे और फीनलैंड की राजदूत रहीं। अंतरराष्ट्रीय मामलों की अच्छी जानकार।

संयुक्त राष्ट्र चुनाव की प्रक्रिया

यूएन महासचिव के चुनाव पर कई बार सवाल उठे हैं। इस बार दावा किया जा रहा है कि पहली बार सभी सदस्य देशों को चुनाव प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इसके तहत सभी 193 सदस्य देशों को पत्र भेजे जाते हैं। प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर महासभा चुनाव करती है। अगले महासचिव का कार्यकाल जनवरी 2017 में शुरू होगा जो 5 साल का होगा। अगर सदस्य देश चाहें तो महासचिव का कार्यकाल पांच साल और बढ़ाया जा सकता है।

किनके सहयोग की होगी जरूरत

वैसे काफी उम्मीद जताई जा रही है कि पहली बार किसी महिला के लिए महासचिव बनने का रास्ता साफ हो। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्यों- रूस और अमरीका को इसके लिए तैयार करना है। इन देशों के पास वीटो पॉवर है। जिनकी सहमति और सहयोग से ही ऐसा ऐतिहासिक परिणाम आ सकता है। जिसमें किसी महिला को यह पद दिया जाए।