70 सेकेंड और उसके बाद दिल्ली खत्म...

सचिन गोस्वामी, नई दिल्ली (17 अगस्त): 70 सेकेंड और उसके बाद दिल्ली खत्म ऐसा कहना है। रूडकी आईआईटी के अर्थ क्वीक विभाग के वैज्ञानिक डॉ अशोक माथुर का। डॉ माथुर के अनुसार पूरा हिमालय क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से बहुत आधिक सवेदनशील है।

इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे प्रति वर्ष 2 इंच खिसक रही है। इसी कारण अभी कुछ समय पहले नेपाल, सिक्किम, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में 7 रियेक्टर तीव्रता से अधिक का भूकंप आ चूका है। जिससे यहां आई तबाही को भूलाया नहीं जा सकता है।

डॉ माथुर ने बताया यह कारण... - हिमालय क्षेत्र के उत्तराखंड में सैकडों वर्षों से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। - उत्तराखंड को हिमालय क्षेत्र का गेप एरिया कहा जाता है और इस क्षेत्र में सैकडों वर्षों से बन रही उर्जा बाहर नहीं निकली है। - गेप एरिया को छोड़कर हिमालय के अन्य क्षेत्रों मे ये उर्जा भूकंप के रूप में निकल चुकी है। जिसका नजारा हम नेपाल पाक में तबाही के रूप मे देख चूके हैं। - डॉ माथूर के शोध के अनुसार उत्तराखंड में बडा भूकंप आने की पूरी संभावना है। - ये भी तय है कि भूकंप का केंद्र यदि उत्तराखण्ड हुआ तो दिल्ली, पश्चि‍मी उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के हिस्सों में भारी तबाही आना तय हैं।

तबाही से बचने के लिए डॉ माथुर ने बनाया वार्निंग सिस्टम... - डॉ माथुर ने इस तबाही को देखते हुए एक अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार किया है। - जिसके लिए उन्होने उत्तराखंड के सवेदनशील क्षेत्रों में 100 से अधिक सेंसर लगाए है। - यदि कही भी 4 रियेक्टर से अधिक की हलचल होगी तो रूडकी स्थित कन्ट्रोल रूम में कुछ ही सेकेंड में पता चल जाएगा। - रूडकी को इस तबाही के बारे में 25 सेकेंड और दिल्ली को लगभग 70 सेकेंड पहले चेताया जा सकता है। - डॉ माथुर अपने इस सिस्टम की ऐप तैयार कर रहे है, जिसके माध्यम से लोगों को चेताया जा सके।

दिल्ली हो जाएगी तबाह... - डॉ माथुर के अनुसार इस तबाही से दिल्ली तो तबाह हो ही जाएगी मगर इस भूकंप का असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर भी बहुत ज्यादा होगा। - हिमालय के बाद जो भी क्षेत्र है वह soft soil क्षेत्र कहलाता है और किसी भी बडे़ भूकंप से यहां की भूमि पूरी तरह से हिल जाएगी। - डॉ माथुर के अनुसार हमारे देश में इस तबाही से बचने की तैयारी न के बराबर है। - भूकंप की दृष्टी से उत्तराखंड 5th जोन में आता है, जो बेहद सवेदनशील स्थिति है।