उत्तर भारत में नहीं रह पाएंगे इंसान, वैज्ञानिकों का खुलासा

नई दिल्ली ( 5 अगस्त ): अमेरिकी पत्रिका विज्ञान की प्रगति द्वारा जारी ताजा अनुसंधान के मुताबिक इस शताब्दी के अंत में दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्रों में गर्मी के दिनों में गर्मी का प्रकोप घातक होगा। ऐसी गर्मी जिसको सहन करना आम इंसान के बस में नहीं होगा। ऐसा दावा एक रिसर्च में किया गया है। 

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बढ़ती गर्मी और उमस की वजह से दक्षिण एशिया के लाखों लोग पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। हाल में हुए एक अध्ययन के मुताबिक अगर ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने वाले उत्सर्जन में कमी नहीं आई तो साल 2100 तक भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बड़े हिस्से में तबाही मच जाएगी। गंगा नदी व सिंधु नदी, जो अनाज की मुख्य सप्लाई देने वाले क्षेत्र हैं वहां की स्थिति गंभीर होगी।

वैज्ञानिकों ने इस तापमान वृद्धि को 'वेट बल्ब' नाम दिया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि 35 डिग्री सेल्सियस वेट-बल्ब तापमान होने पर इंसान का शरीर गर्मी को नहीं झेल सकता है और इस स्थिति में कुछ ही घंटो में उसकी जान भी जा सकती हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि सन 2100 आते आते भारत में 32 डिग्री सेल्सियस वेट-बल्ब तापमान हो जाएगा साथ ही भारत के कुछ हिस्सों में 35 डिग्री सेल्सियस वेट-बल्ब तापमान बी देखने को मिलेगा जो कि बेहद भयावह स्थिति होगी। 

वैज्ञानिकों ने धरती की अभी की जलवायु की बात करते हुए बताया कि अभी धरती तापमान 3 डिग्री सेल्सियस वेट-बल्ब है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इसे रोकने के लिए जल्द ही हमें कार्बन (ग्रीनहाउस) गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए गंभीरता से कदम उठाना पड़ेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो तापमान बढ़ने के साथ ही कृषि उत्पादन में कमी देखने को मिलेगी और गर्मी के साथ साथ हमें अकाल से मरते हुए लोग भी दिखाई देंगे।