जानें, भारत के लिए क्यों अहम है ' हार्ट ऑफ एशिया समिट' ?

अमृतसर (4 दिसंबर): अमृतसर में आज से 'हार्ट ऑफ एशिया'समिट का आयोजन शुरू हो रहा है। इस सम्मेलन करीब 40 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के पहले दिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी संबोधित करेंगे।

दुनिया भर के अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की तरह 'हार्ट ऑफ एशिया ' सम्मेलन का आयोजन कुछ खास मकसद के लिए किया जाता है। हार्ट ऑफ एशिया की शुरुआत 2 नवंबर ,2011 को इंस्ताबुल में हुई थी। इस सम्मेलन का मकसद अफगानिस्तान को स्थिरता और समृद्धि प्रदान करना है। अफगानिस्तान के सहयोग के लिए स्थापित इस संगठन के 14 सदस्य देश हैं। इस संगठन में भारत के साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अजरबैजान, चीन, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.

यह संगठन क्षेत्रीय देशों के बीच संतुलन साधने, समन्वय बैठाने और आपसी सहयोग बढ़ाने का भी काम करता है। हार्ट ऑफ एशिया में 14 सदस्य देश, 17 सहयोगी देश और 12 सहायक और अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं।

अमृतसर में आयोजित होने वाली छठी हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद को खत्म करना है। गौरतलब है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला देश है। भारत के विदेश सचिव एस. जयशंकर और अफगानिस्तान के उप विदेश मंत्री हिकमत खलील करजई बैठक की संयुक्त अध्यक्षता कर रहे हैं। बैठक में कल के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के मसौदों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और साथ ही इसके घोषणापत्र पर भी चर्चा की जा रही है, जिसका एक बड़ा हिस्सा आतंकवाद से संबंधित होगा।