मानवाधिकारों के लिए समर्पित संगठन मिलकर काम करें- डॉ. तपन कुमार

मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर सुधार के लिए विभिन्न देशों के राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों को मिलकर काम करना होगा

मानवाधिकारों के लिए समर्पित संगठन मिलकर काम करें- डॉ. तपन कुमार
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दुनिया भर के कई देशों में धर्म, नस्ल, क्षेत्र, भाषा और संस्कृतियों आदि के आधार पर नागरिकों के उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर मानवाधिकारों का मुद्दा एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गया है। इस मसले पर अंतरराष्ट्रीय संगठन विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग (डब्ल्यूएचआरपीसी) का मानना है कि मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर सुधार के लिए विभिन्न देशों के राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। इसके लिए समय-समय पर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होने चाहिए, जहां मानवाधिकारों के लिए काम कर रही संस्थाओं और व्यक्तियों को काम के दौरान आने वाली परेशानियों और चुनौतियों पर चर्चा हो और कोई उचित समाधान निकाला जा सके। 


डब्ल्यूएचआरपीसी के अध्यक्ष डॉ. तपन कुमार राउतराय कहते हैं "राजनीतिक और सैन्य शक्तियों पर केंद्रित सत्ताओं के इस दौर में मानवाधिकारों की रक्षा करना और उन्हें आदर्श स्वरूप में बनाए रखना आज की तारीख में सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। यही वजह है कि दुनियाभर में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों पर लोगों की निगाहें सबसे ज्यादा रहती हैं। उनका काम तारीफ के काबिल तो है, लेकिन जरा सी गलती या कोताही होने उन्हें सार्वजनिक रूप से आलोचना का शिकार भी होना पड़ता है। चीन दौरे के बाद हुई यूएनएचआरसी प्रमुख मिशेल बैचेलेट की आलोचना इसका ताजा उदाहरण है। मिशेल बैचेलेट की आलोचना इस बात को लेकर हो रही है उन्होंने चीन में अल्पसंख्यक मुस्लिमों के कथित मानवाधिकारों के हनन की आलोचना नहीं की।"  




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डॉ. तपन कुमार बताते हैं कि डब्ल्यूएचआरपीसी संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित अधिकारों के यूनिवर्सिल डिक्लेरेशन की रक्षा के लिए समर्पित है और लगातार इस बात के लिए प्रयासरत है कि देशों ही नहीं, बल्कि राज्यों की सरकारें भी मानवाधिकारों को लेकर संवेदनशील बनें। इसी मकसद से इसमें दुनिया भर के शिक्षाविद और बुद्धिजीवी समूहों को शामिल किया गया है। इसके अध्यक्ष देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं। डॉ तपन के मुताबिक "ज्यादातर लोगों को मानवाधिकारों की सीमित समझ ही है। यूनिवर्सिल डिक्लेरेशन में 30 अधिकार शामिल हैं, जिन्हें अपनाकर एक सभ्य, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण समाज बनाया जा सकता है। असल में मानवाधिकार किसी भी समाज के वे मूल अधिकार और स्वतंत्रता हैं जो हर व्यक्ति के साथ जन्म से लेकर मृत्यु तक रहते हैं। उन्हें कभी भी नहीं हटाया जा सकता। हां, प्रतिबंधित जरूर किया जा सकता है।"


डब्ल्यूएचआरपीसी मानवाधिकारों को अपनाने और उनका प्रसार करने के लिए व्यक्तियों, शिक्षकों, संगठनों और सरकारी निकायों को एकजुट करता है। इसका मकसद लोगों को मानवाघिकारों से अवगत कराना, जनता से जुड़े मुद्दों पर उल्लेखनीय काम कर रहे लोगों को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान करना और अन्य गतिविधियां संचालित करना है।  डॉक्टरेट की मानद उपाधि देने का मकसद भी यही है कि मानवाधिकारों के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे लोगों को प्रोत्साहित किया जाए और वे इस विषय पर होने वाले राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय विमर्श और बहसों का हिस्सा बनें। उनमें सक्रिय रूप से भागीदारी करें। डब्ल्यूएचआरपीसी आमतौर पर उन व्यक्तियों को सम्मानित करने को प्राथमिकता देता है, जिन्होंने विज्ञान, मानविकी और व्यवसायों में उत्कृष्ट योगदान दिया है।




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डब्ल्यूएचआरपीसी मानवाधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों और गतिविधियों का अध्ययन कर सरकार को उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सिफारिशें भी करता है। जिन क्षेत्रों में मानवाधिकार से संबंधित पर्याप्त कानून की कमी है या उनमें सुधार की जरूरत है, वहां डब्ल्यूएचआरपीसी कानून और नीतियां बनाने के प्रयासों में सबसे आगे रहता है। बाल यौन शोषण, सांप्रदायिक अपराध, भोजन और काम के अधिकार के लिए संगठन हर वक्त सक्रिय रहता है। अदालत, मीडिया और विभिन्न सार्वजनिक और कानूनी संस्थाओं में मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने वाले कानूनों और नीतियों को आगे बढ़ाने में डब्ल्यूएचआरपीसी हमेशा आगे रहता है। यह ऐसे हर कानून, नीति और गतिविधि का विरोध करता है, जो मानवाधिकारों को कमजोर करती हैं।





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