बजट से हेल्थ सेक्टर को बड़ी आस, सरकार को ध्यान रखनी होंगे ये बातें...

नई दिल्ली (31 जनवरी): मोदी सरकार के बजट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। हालांकि इन्हें किस हद तक पूरा किया जाएगा यह यह बजट पेश होने के बाद ही पता लग पाएगा। हेल्थ सेक्टर भी सरकार के बजट पर नजर लगाए हुए हैं और उनको उम्मीद है कि इस बार सरकार स्वास्थ्य बजट को बेहतर बनाने पर काम करेगी।

सरकार को प्राथमिक और आपातकालीन चिकित्सा सेवा पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए। अभी भी 70 से 80 फीसदी आबादी इलाज के लिए निजी क्षेत्र पर निर्भर है। यह तभी संभव हो पाएगा जब सरकार स्वास्थ्य बजट पर कम से कम जीडीपी का दो फीसदी खर्च करे।

- स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करना है तो सबसे पहले प्राथमिक और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।

- इसके लिए सरकार को स्वास्थ्य बजट के दौरान निजी या सरकारी क्षेत्र नहीं, बल्कि मरीज की सुविधा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

- मरीज को प्राथमिक और आपातकालीन चिकित्सा हर हाल में घर के नजदीक मिलनी चाहिए।

- सरकार को स्वास्थ्य बजट पर जीडीपी का कम से कम दो फीसदी खर्च करना चाहिए।

- आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

- देश में विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सेज, चिकित्सा कर्मियों की कमी एक बड़ी समस्या है इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।

- सरकार को विदेशों से आयात होने वाली मेडिकल इक्यूपमेंट की कीमतों को कम करने पर काम करना चाहिए।

इससे देश के मरीजों को सस्ता इलाज मिलने में मदद मिलेगी।

- सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 50 फीसदी से ज्यादा लोग अपनी आर्थिक क्षमता से ज्यादा अपने इलाज पर खर्च करते हैं और हर वर्ष करीब 6 करोड़ लोग इलाज में हुए ज्यादा खर्च की वजह से गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं।

- गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दवाओं को सस्ता किया जाए। अभी दवा की कीमत काफी अधिक है।

- नर्सिंग होम खोलने के लिए सस्ते ब्याज दर पर ऋण दिया जाए। यह लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है।

- मेडिकल कॉलेजों में सुविधाएं बढ़ाई जाए। मेडिकल कॉलेज की संख्या भी बढ़ाई जाए। ताकि चिकित्सकों की कमी दूर हो सके।

- मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को कम ब्याज दर पर ऋण दिया जाए। मेडिकल की पढ़ाई को भी सस्ता किया जाए। अभी मेडिकल कॉलेजों की फीस काफी अधिक है।