हेडली के खुलासे से इशरत केस पर नहीं पड़ेगा कोई फर्क

 

नई दिल्ली (11 फरवरी): इशरत जहां को लेकर डेविड कोलमैन हेडली के खुलासे पर केंद्र सरकार का रुख सामने आया है। केंद्र सरकार के सूत्रों ने जानकारी दी है कि हेडली के खुलासे से इशरत के केस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हेडली ने अपनी गवाही में कहा, 'उसने लखवी से सुना था कि इशरत लश्कर की आत्मघाती हमलावर थी।'

गुजरात में साल 2004 में हुई फर्जी मुठभेड़ में इशरत जहां मारी गई थी। ऐसा बताया गया कि आपराधिक मुकदमे में हेडली की गवाही का सबूत स्वीकार्य नहीं हो सकता है। हेडली ने अमेरिका से वीडियो लिंक के जरिए गवाही देते हुए मुंब्रा की 19 वर्षीय लड़की के बारे में खुलासा किया। जब विशेष सरकारी अभियोजक उज्ज्वल निकम ने हेडली से उस ‘असफल अभियान’ के बारे में जिरह की जिसका जिक्र लश्कर कमांडर जकी-उर रहमान लखवी ने उससे (हेडली) किया था, तो उसने (हेडली) इशरत का नाम लिया।

हेडली ने अदालत को बताया कि लखवी ने उससे लश्कर के एक अन्य आतंकवादी मुजम्मिल बट्ट के भारत में उस ‘असफल अभियान’ का जिक्र किया था जिसमें आतंकवादी संगठन की एक महिला सदस्य मारी गई थी। इस अभियान और उसमें शामिल सदस्यों के बारे में विस्तार से जानकारी देने के लिए निकम के जोर देने पर हेडली ने कहा, ‘मुझे बताया गया था कि पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई थी जिसमें एक (महिला) आत्मघाती हमलावर मारी गई थी।’ इसके बाद अभियोजक ने तीन नाम लिए जिनमें से हेडली ने इशरत के नाम को चुना। इससे पहले उसने अदालत को बताया कि ‘लश्कर में एक महिला शाखा है और किसी अबु ऐमन की मां इसकी अध्यक्ष थी।’