सेक्स के लिए मना करने पर प्रेमी को जिंदा जला डाला था, HC से मिली राहत

मुंबई (18 फरवरी) :  शारीरिक संबंध बनाने से प्रेमी के इनकार करने पर उसे जला कर मार देने की दोषी महिला को बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सज़ा को कम करके 10 साल कर दिया है। महिला 10 साल जेल में काट चुकी है इसलिए उसकी रिहाई का आदेश दे दिया गया है।

नवी मुंबई की यास्मीन शेख पर आरोप साबित हुआ था कि उसने 10 साल पहले अपने प्रेमी अली शेख़ को सिर्फ इसलिए जला दिया था क्योंकि उसने सेक्स करने से इनकार किया था। इस घटना में अली की मौत हो गई थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने यास्मीन पर लगे हत्या के आरोप की गंभीरता को कम करते हुए उसे गैर इरादतन हत्या में बदल दिया। यास्मीन और अली करीब डेढ़ साल रिलेशनशिप में रहे। 29 जून 2006 की रात इस जोड़े ने शराब पी। कोर्ट में चले मुकदमे के मुताबिक यास्मीन उस वक्त अली के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहती थी। लेकिन अली ने शराब के नशे में होने की वजह से असमर्थता जता दी। इस पर यास्मीन ने अली से झगड़ना शुरू कर दिया। फिर यास्मीन ने अली पर केरोसिन डालकर आग़ लगा दी। अली की चीख सुनने के बाद आसपास के लोग आए और उसे अस्पताल ले गए। वह 57 फीसदी जल गया था। दो हफ्ते बाद उसकी मौत हो गई। अली ने मरने से पहले पुलिस को भी यही बयान दिया कि सेक्स से मना करने पर यास्मीन ने उसे जला दिया था।

2008 में ट्रायल कोर्ट ने यास्मीन को हत्या का दोषी माना और उम्रकैद की सज़ा सुनाई। इसके ख़िलाफ़ यास्मीन ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने यास्मीन की उम्रकैद को 10 साल की सज़ा में बदल दिया।

जस्टिस विजया काप्से ताहिलरमानी और जस्टिस शालिनी फानसलकर जोशी की बेंच ने कहा, अली को जलाने का इरादा यास्मीन ने पहले से तय नहीं कर रखा था। दोनों के बीच अच्छे संबंध थे। पूरी घटना 'अचानक हुई लड़ाई' का नतीजा लगती है। बेंच ने कहा कि घटना उन अपवादों में आती है, जिन्हें हत्या नहीं कहा जा सकता।