तिब्बती मूल के भारतीयों को जारी हो पासपोर्ट

 

नई दिल्ली(23 सितंबर): दिल्ली हाई कोर्ट ने तिब्बती मूल के तीन भारतीय नागरिकों को राहत देते हुए उन्हें पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने साफ किया है कि 26 जनवरी 1950 के बाद और एक जुलाई 1987 तक भारत में पैदा हुए तिब्बती मूल के लोग इंडियन सिटिजन हैं और ऐसे में उन्हें इंडियन पासपोर्ट जारी करने से मना नहीं किया जा सकता। 

- हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह साफ किया है कि इस पीरियड के दौरान इंडिया में पैदा हुए तिब्बती मूल के लोगों को सिटिजनशिप ऐक्ट के तहत भारतीय सिटिजन माना जाएगा।

- दिल्ली हाई कोर्ट में तीन भारतीय तिब्बतियों की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया था कि उन्हें इंडियन पासपोर्ट देने से मना किया गया है। इन तीनों याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह फैसला दिया है। इनमें से दो ने कहा कि वह 26 जनवरी 1950 से एक जुलाई 1987 के बीच पैदा हुए हैं। जबकि एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि उनके पिता इस दौरान पैदा हुए थे। फिर भी पासपोर्ट विभाग ने उन्हें पासपोर्ट जारी करने से मना कर दिया। जबकि नियम के मुताबिक वे इंडियन सिटिजन हैं।

- हाई कोर्ट ने अपने इस महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि तीनों याचिकाकर्ता जन्म के हिसाब से भारतीय नागरिक हैं इसलिए उन्हें पासपोर्ट देने से मना नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इन्हें चार हफ्ते में पासपोर्ट जारी कर दिया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि इंडियन सिटिजनशिप ऐक्ट के तहत प्रावधान है कि 26 जनवरी 1950 के बाद इंडिया में पैदा हुआ हर शख्स भारतीय नागरिक है। ये कानून 1955 में बनाया गया था, लेकिन बाद में कानून में बदलाव हुआ और कहा गया कि एक जुलाई 1987 तक पैदा हुए शख्स ही भारतीय नागरिक होंगे। इसके बाद पैदा हुए शख्स इंडियन सिटिजन होने का दावा नहीं कर सकते।

- हालांकि ऐसे शख्स के पैरंट्स में से कोई एक अगर एक जुलाई 1987 तक पैदा हुए है तो वह भी भारतीय नागरिकता का हकदार है। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि वे इंडियन वोटर हैं। लेकिन पासपोर्ट डिपार्टमेंट ने कहा था कि चूंकि वह तिब्बती मूल के हैं ऐसे में उन्हें पासपोर्ट नहीं दिया जा सकता।