दिल्ली में कैसे प्रकट हुए 108 फीट के हनुमान?

वरुण सिन्हा, नई दिल्ली (21 दिसंबर): दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वो इस बात का पता लगाए कि दिल्ली के करोलबाग में 108 फुट ऊंची हनुमान की मूर्ति किसने और कैसे बनाई। आखिर कैसे डीडीए की जमीन पर बन गया मंदिर और गाड़ियों का शोरूम। कोर्ट को शक है कि बजरंगबली की मूर्ति के बहाने एक बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है।

दिल्ली की शान कहे जाने वाले करोलबाग के 108 फीट उंची हनुमान मूर्ति को हटाने का विवाद अभी सुलझा भी नहीं है कि हनुमान मूर्ति पर दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश ने एक बार फिर बजरंगबली को सुर्खियों में ला दिया है। हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया है।

- सीबाआई को दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश - करोलबाग स्थित हनुमान प्रतिमा बनाने की जांच करें - गाड़ियों के शोरुम के अतिक्रमण की भी जांच करें - पद का दुरूपयोग कर किसने प्रतिमा लगाने की अनुमति दी - मंदिर और गाड़ी के शो रुम ने 1170 स्कॉवयर यार्ड जमीन पर कब्जा

कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने सीबीआई को ये भी निर्देश दिए हैं कि डीडीए, उत्तरी दिल्ली निगम, लोक निर्माण विभाग और मंदिर मार्ग पुलिस के उन सभी अधिकारियों को लेकर जांच करे जो इसके निर्माण और अतिक्रमण में शामिल रहे हैं। मंदिर के ट्रस्टी सिर्फ लाभ कमाने के लिए नहीं है वो सरकारी जमीन पर मंदिर बनाकर मजे ले रहे हैं।

पीठ ने मॉडल बस्ती में मौजूद यूको बैंक में मंदिर के नाम से खुले खातों को बंद करने के भी निर्देश दिए हैं और कहा है कि खाते में पैसे जमा किए जा सकते हैं लेकिन निकाले नहीं जा सकते है। कोर्ट में पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर की मासिक आय करीब 4 लाख रुपए है, वास्तविक आय ज्यादा हो सकती है।

कोर्ट ने जिस तरह से हनुमान मंदिर के बहाने हुए भ्रष्टाचार पर निगाहें सख्त की है उससे लगभग ये साफ हो गया है कि कोर्ट भी ये मान चुका है कि हनुमान मूर्ति, मंदिर और शोरूम के अवैध निर्माण के पीछे सोची समझी साजिश है, जिसका कुछ लोगों ने जमकर फायदा उठाया गया है। इसलिए सीबीआई उन सभी लोगों को जल्द से जल्द चिन्हित कर कार्रवाई करना चाहती है जिन लोगों ने भगवान के नाम पर जमकर मजे लुटे हैं।