किरकिरी के बाद हेमा का फैसला, 'ट्विटर अपडेट्स को फिल्म-डांस तक सीमित रखूंगी'

नई दिल्ली, (14 जुलाई): बीजेपी बहुत सोच-समझकर शोले की बसंती को सियासत में लेकर आई थी। मथुरा से सांसद बनाया। लेकिन दो साल बाद हेमा मालिनी को ध्यान आया है कि जनता के दुख-दर्द पर बात करना उनके बस का नहीं है। इसलिए अब वो सिर्फ नाच-गाने खेल-तमाशे के बारे में ट्वीट किया करेंगी। दरअसल मथुरा में जब जवाहर बाग से लाशें निकल रही थीं तो हेमा मालिनी मुंबई की शूटिंग में मस्त थीं। उसकी फोटो पर डाल रही थीं। इसपर इतना हंगामा मचा कि स्वप्न सुंदरी को राजनीति की बात से भी नफरत हो गई। 

यूं कि पूरा हिंदुस्तान जानता है कि बसंती को ज्यादा बोलने की आदत नहीं। यूं कि बिना बोले ही विवाद हो जाता है। यूं कि बोले तो विवाद न बोले तो विवाद। जब से राजनीति में कदम रखा है, विवाद ही विवाद हो रहा है। ट्विटर पर चार लाइन तो लिखना होता है लेकिन उसी में बीजेपी को फंसा दिया। सो एलान कर दिया है अब से लिखना दिखना बंद। बसंती का एलान है अब से नो पॉलिटिक्स ओनली एंटरटेनमेंट।

काफी विचार करने के बाद मैंने अपने ट्विटर अपडेट्स को मेरी फिल्म और नृत्य गतिविधियों तक सीमित रखने का निर्णय किया है। 

यूं कि ये क्या बात हुई। बीजेपी ने मुंबई की ड्रीमगर्ल को मथुरा में अवतार दिलाया था। चुनाव लड़ाया। सांसद बनाया। लेकिन मथुरा का एमपी होने से क्या होता है। सिनेमा की स्वप्नसुंदरी का दिल मुंबई में ही अटका रहता है। और मन ही नहीं अटका रहता है। जब मथुरा में आग लगी होती है तो वो मुंबई में शूटिंग कर रही होती हैं। यूं कि शूटिंग की फोटो। शूटिंग की बात। आपको याद होगा जब जवाहर बाग से लोगों की लाशें निकल रही थीं तब भी हेमा मालिनी मुंबई में मस्त थीं। देखो हमारा मुस्काना देखो। देखो आना-जाना देखो। देखो भाई फसाना देखो। 

इस ट्वीट पर बीजेपी की एमपी की ऐसी लानत-मलामत हुई कि राजनीति की बात से ही भाग खड़ी हुईं। कितनी अजीब बात है कि भारत की सत्ताधारी पार्टी की एक एमपी कह रही है कि वो राजनीति की नहीं नाच गाने की बात करेगी। वो जनता की नहीं खेल तमाशे की बात करेगी। वो लोगों की तकलीफों की नहीं मस्ती के आइटम नंबर की बात करेगी।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, "काफी विचार करने के बाद मैंने अपने ट्विटर अपडेट्स को मेरी फिल्म और नृत्य गतिविधियों तक सीमित रखने का निर्णय किया है।"