भारतीय मूल के युवा साइंटिस्ट का दावा- ढूंढ लिया 'ब्रेस्ट कैंसर' का इलाज

नई दिल्ली (29 अगस्त): ब्रेस्ट कैंसर पिछले कुछ सालों में जानलेवा बीमारी बनकर सामने आया है। इसका इलाज ढ़ूंढ़ने में दुनिया भर के तमाम वैज्ञानिक लगे हुए हैं। इसी बीच भारतीय मूल के एक ब्रिटिश किशोर ने ब्रेस्ट कैंसर के सबसे खतरनाक रूप के इलाज का असरदार तरीका ढूंढ़ने का दावा किया है।

- रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मूल के 16 वर्षीय क्रटिन नित्यनंदम ने ऐसे उपाय का पता लगाया है, जिससे ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर पीडि़तों पर दवा असरदार साबित हो सकेगी। - इस पर मौजूदा समय में दवा का असर नहीं होता है।  - सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी से ही इसके प्रसार को रोकना संभव है। - इसके लिए नित्यनंदम को ब्रिटेन के प्रतिष्ठित 'द बिग बैंग फेयर' के फाइनल में जगह दी गई है। - एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरॉन या ग्रोथ केमिकल में गड़बड़ी के कारण ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आते हैं। - इसे दवा (जैसे टैमोक्सीफेन) की मदद से रोका जा सकता है।  - ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर में रिसेप्टर के अभाव के कारण दवाएं असरहीन हो जाती हैं।  - रिसेप्टर एक तरह का कोशिकीय ढांचा होता है जो रासायनिक पदार्थो के प्रति संवेदनशील है। - यह रिपोर्ट 'द संडे टेलीग्राफ' में नित्यनंदम के हवाले से प्रकाशित हुई है। 

क्या कहना है नित्यंदन का नित्यंदन ने कहा, "मैं वास्तव में कैंसर के असाध्य रूपों के इलाज का तरीका तलाश रहा था। मेरा लक्ष्य इसे इलाज योग्य स्थिति में लाना था। आइडी-4 प्रोटीन अनडिफ्रेंशिएटेड स्टेम सेल कैंसर को डिफ्रेंशिएट में परिवर्तित होने से रोकता है। ऐसे में आइडी-4 को रोकना जरूरी हो जाता है। मैंने इस प्रोटीन को उत्पन्न करने वाले जीन को निष्क्रिय करने का तरीका ईजाद किया है, ताकि कैंसर खतरनाक स्तर तक न पहुंच सके।"