दिल्ली की इन ऐतिहासिक इमारतों में है भूतों का बसेरा ?

नई दिल्ली (16 दिसंबर):  दिल्ली ने मारकाट और हिंसा को खूब देखा है। लोग कहते हैं कि दिल्ली का अधिकांश हिस्सा कब्रिस्तान है। इन्हीं शक और संशयों के बीच आज भी कुछ जगह ऐसी हैं जहां मृत आत्माओं का वास है। कुछ लोग इन जगहों को भूतों का बसेरा भी कहते हैं-

दिल्ली कैंट- वैसे तो इस इलाके को बेहद सुरक्षित माना जाता है, मगर रात के अंधेरे में जाने की हिम्मत कोई नहीं रखता। यहां से गुजरने वाले कई लोगों ने एक डरावनी बुजुर्ग महिला को रातों में घूमते देखा है। ये महिला यहां से गुजरने वाले लोगों को परेशान करती है।

उग्रसेन की बावली- कनाट प्लेस में भी ऐसी जगह हो सकती है, इस पर यकीन करना मुश्किल है। मगर यह सच है, आज़ादी से पहले की बनी इस बावली के बारे में कहा जाता है कि पहले इसमें काला पानी भरा रहता था, जिसमें लोग कूद कर आत्महत्या किया करते थे।

फिरोज शाह कोटला फोर्ट- कहा जाता है यहां की हवेलियों और खंडहरों पर जिन्नों का कब्जा है। आज भी यहां के लोग हर गुरुवार को आ कर मन्नत मांगते हैं। इस किले का निर्माण वर्ष 1534 में फिरोज शाह तुगलक ने करवाया था।

हाउस नम्बर डब्लू3- लोगों का कहना है कि ग्रेटर कैलाश-1 स्थित इस घर से रात में किसी के रोने और चीखने-चिल्लाने की आवाजें आती हैं। कहा जाता है कि इस घर में एक बुजुर्ग दम्पति की हत्या कर दी गई थी और महीने बाद वहीं की टंकी से उनकी बॉडी बरामद की गई थी। अब इस घर में कोई नहीं रहता है।

द्वारका सेक्टर 9 मेट्रो स्टेशन- नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कॉल सेंटर के लोगों की शिकायत है कि इस इलाके मे लोगों को थप्पड़ पड़ते हैं। साथ ही वो बताते हैं कि उनके कैब के आगे एक औरत आ जाती है, जो तेज रफ्तार से आगे-आगे दौड़ने के बाद अचानक गायब हो जाती है।

ख़ूनी नदी- रोहिणी के इलाके से बहती इस नदी के बारे में कहा जाता है कि कि जो भी इस नदी के सम्पर्क में आता है, ये नदी उसका ख़ून चूस लेती है। हालांकि इनमें से मौत के आधे से अधिक केसेज आत्महत्या के माने गए हैं।

संजय वन- वैसे तो साउथ दिल्ली के बीचो-बीच बसे इस लगभग 10 किलोमीटर के जंगल में भरपूर हरियाली है। मगर ये भूतों के लिए कुख्यात है। कई लोगों का कहना है कि यहां उन्होंने बच्चों के रोने की आवाजें सुनी हैं।

मलछा महल- दिल्ली के मलछा गांव में ये महलनुमा पुराना खंडहर है। ये स्थान चारोम तरफ जंगलों से घिरा हुआ है। स्थानीय लोग भी इसके बारे में कुछ खास नहीं जानते। वो कहते हैं कि सिर्फ यहां मौजूद होने भर से लोग डर जाते हैं।

निकोल्सन कब्रगाह- ये दिल्ली की सबसे पुराने कब्रगाहों में से एक है। इसे ब्रिटिश राज में स्थापित किया गया था। इस कब्रगाह में ब्रिटिश सैनिकों, उनके पत्नियों और बच्चों की कब्रें हैं। यहां जाने वाला कोई भी इंसान दैवीय धमक महसूस कर सकता है।

पुराना किला- यह महरौली आर्केलॉजिकल कॉम्पलेक्स मे स्थित है। इसका नाम एक सूफी संत शेख जमाली और उनके शागिर्द कमाली के नाम पर है। इस इलाके मे लोगों ने धक्का-मुक्की होने की शिकायतें की हैं। साथ ही वो बताते हैं कि यहां से औरतों के रोने और चीखने-चिल्लाने की आवाजें भी आती हैं।

खूनी दरवाजा- ये नाम ही अपने आप में डरावना है और ये जगह इतिहास में दर्ज है। यहां बहादुर शाह ज़फर के तीन लड़कों को अंग्रेजों ने गोली मार दी थी, जिसके बारे में प्रचलित है कि आज भी इनकी आत्माएं आस-पास भटकती हैं और लोगों से अपमान का बदला लेने पर उतारू रहती हैं।

लोथियन सेमेंट्री- लोथियन सेमेट्री इसाइयों का कब्रिस्तान है, जहां पर भूतों की कई कहानियां प्रचलित हैं। इनमें सिरकटे भूत की कहनी भी शामिल है। लोगों का कहना है कि यह भूत एक जवान सिपाही है, जिसकी प्रेमिका ने उसे ठुकरा दिया था। प्रेमिका के धोखा देने पर सिपाही ने अपना सिर काट लिया, जो अब अक्सर लोगों को दिखाई देता