क्लास 2 तक पढ़े थे हाशिम अंसारी, जानिए उनके बारे में अहम बातें

नई दिल्ली(20 जुलाई): राम जन्मभूमि मंदिर और् बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी का निधन हो गया। दिल की बीमारी से ग्रस्त 96 वर्षीय अंसारी ने अपने अयोध्या स्थित आवास पर सुबह 5.30 बजे अंतिम सांस ली।

हाशिम अंसारी का परिवार कई पीढ़ियों से अयोध्या में रह रहा है। हाशिम अंसारी साल 1921 में पैदा हुए लेकिन जब वे सिर्फ ग्यारह साल के थे कि सन् 1932 में उनके पिता का स्वर्गवास हो गया। उन्होंने महज दूसरी कक्षा तक पढ़ाई की और फिर सिलाई यानी दर्जी का कम करने लगे। बाद में उनकी शादी पास ही के जिले फैजाबाद में हुई। अंसारी के दो बच्चे हुए, एक बेटा और एक बेटी। अंसारी के परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं रही।

1949 में जब बाबरी मस्जिद के अंदर मूर्तियां रखी गईं, उस समय प्रशासन ने शांति व्यवस्था के लिए जिन लोगों को गिरफ्तार किया, उनमे अंसारी भी शामिल थे। उनका कहना है कि क्योंकि उनका सभी के साथ सामाजिक मेलजोल था इसलिए लोगों ने उनसे मुकदमा करने को कहा और इस तरह वो बाबरी मस्जिद का पैरोकार बन गए। बाद में 1961 में जब सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मुकदमा किया तो उसमे भी अंसारी एक मुद्दई बने।

पुलिस प्रशासन की सूची में नाम होने की वजह से 1975 की इमरजेंसी में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें आठ महीने तक बरेली सेंट्रल जेल में रखा गया।

6 दिसंबर, 1992 के बलवे में बाहर से आए दंगाइयों ने उनका घर जला दिया लेकिन अयोध्या के हिंदुओं ने उन्हें और उनके परिवार को दंगाईयों की भीड़ से बचाया। इस घटना के बाद हामिद अंसारी को सरकार की तरफ से जो कुछ मुआवजा मिला, उससे उन्होंने अपने छोटे से घर को दोबारा बनवाया और एक पुरानी अम्बेसडर कार खरीदी।