तकरीबन 100 घंटे से 125 फीट गहरे बोरवेल में फंसा दो साल के फतेह, आज है जन्मदिन

fatehveer विशाल एंग्रीश, न्यूज 24 ब्यूरो, संगरूर (10 जून): संगरुर में बच्चे के बोरवेल में गिरने की ख़बर ने पूरे सिस्टम को झकझोर डाला है। लोगों में गुस्सा है कि अब तक फतेहवीर को बोरवेल से निकाला नहीं जा सका है।  पांच दिनों से बोरवेल में गिरे फतेहवीर के लिए पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि वो बच्चे की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। जरा सोचिए पांच दिन लग गए। दो साल के मासूम की ज़िंदगी के लिए दो शब्द कहने में। इधर रेस्क्यू ऑपरेशन की टीम है जिसने टनल ही गलत दिशा में बना डाला। फतेहवीर अब भी सवा सौ फीट नीचे नौ इंच की बोरवेल में सांसों के साथ जंग लड़ रहा है। आज उसका जन्मदिन है। देश दुआ मांग रहा कि आज फतेहवीर का पुनर्जन्म हो।

NDRF और सेना की टीमें दिन-रात जुटी हैं लेकिन फतेहवीर अब भी फंसा है। रविवार की शाम उम्मीद जगी कि अब बस चंद घंटे का इंतजार है और फतेहवीर मुस्कुराता हुआ मां की गोद में होगा। लेकिन अब ये सब्र का बांध टूटता दिख रहा है। कल फतेहवीर के लिए दुआ में जो हाथ उठे थे वो आज गुस्से में हैं। गुस्से में हैं क्योंकि पांच दिनों की खुदाई का हश्र कुछ नहीं हुआ। अब तक फतेहवीर की जान बचाने वालों का इंतजाम ढाक के तीन पात साबित हुआ है। यहां तक कि तकनीकी ज्ञान की कमी की वजह से गलत दिशा में टनल तक बना दिया।

इधर दर्द की इंतेहा ये है कि आज फतेहवीर का जन्मदिन है। माता-पिता की इकलौती संतान है फतेहवीर। ज़रा सोचिए जिसके कलेजे का टुकड़ा बोरवेल में फंसा हो उस पर क्या बीतती होगी। फतेहवीर के लिए दुआ में उठे इन चेहरों से पूछिए रब्ब से क्या मांग रहे होंगे। फतेहवीर के सुरक्षित निकलने तक दिन रात यहीं बिताने वाले इन लोगों से पूछिए। क्यों आए हैं फतेहवीर को बचाने। क्या रिश्ता है इनसे उसका। लेकिन इंसानियत के रिश्तों में वजह की दरकार कहां होती है। पूरा संगरुर फतेहवीर के पाताल फतेह का इंतजार कर रहा है।

लेकिन फिलहाल तो बस ये तस्वीर ही सहारा है। लैपटॉप से ली गई इस तस्वीर में फेतहवीर के सिर्फ दो हाथ दिख रहे हैं। कहा जा रहा है फतेहवीर गिरते ही बेहोश हो गया था। लिहाजा उसके खाना-पानी तो नहीं दिया जा रहा। लेकिन उसकी सांसों को सहारा मिलता रहे इसके लिए ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे अधिकारियों का कहना है कि बोरवेल सिर्फ नौ इंच चौड़ा होने से परेशानी आ रही है। शुक्रवार को एनडीआरएफ की टीम ने अर्थ मूविंग मशीन मंगाकर 60 फीट तक गड्ढा खोदा लेकिन फिर उन्होंने तरीका बदल दिया और फिर जेसीबी से खुदाई शुरू की गई। टीम बोरवेल के समानांतर 36 इंच चौड़ा दूसरा बोरवेल खोद रही है ताकि उसके जरिए बच्चे तक पहुंचा जा सके। रेस्क्यू ऑपरेशन में अनुभव की कमी नजर आई। पहले मशीनरी उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा था लेकिन उससे बच्चे को नुकसान हो सकता था इसलिए अब इसे हाथों से खोदा जा रहा है।

फतेह जिंदगी की जंग फतह करता है तो ये उन दुआओं का ही असर होगा। लेकिन सवाल तो उस सिस्टम का है। जिसने फतेहवीर के गिरने के लिए बोरवेल पहले से तैयार कर रखा था। सवाल उस सिस्टम से है जिसने पांच घंटे लगा दिए ऑपरेशन फतेहवीर की शुरुआत में सवाल उस सिस्टम का है कि बच्चे बोरवेल में गिरने की जब भी ख़बरें आती है तो उन्हें चंद दिनों बाद भूला क्यों दिया जाता है। सवाल उस सिस्टम से है जो अब तक ऐसा कोई सिस्टम नहीं ईजाद कर पाया कि जब भी किसी मासूम के साथ ऐसा हादसा हो उसे बचा लिया जाए। फतेह वीर है लौटेगा। प्रार्थना के लिए ये उठे इन हाथों का असर तो होना ही है। लेकिन सवाल तब भी तैरता रह जाएगा कि कब तक बोरवेल में गिरते रहेंगे इस देश के फतेहवीर जैसे बच्चे।