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दंगल में बाल बने बाधा तो 30 बेटियों ने करा डाले मुंडन

महिला कुश्ती का नाम सुनते ही आपके जहन में दंगल फिल्‍म का नाम जरूर आता होगा, बेटियां बाल संवारने में न लगी रही और बाल मिट्टी में खराब न हों, इसलिए महाबीर फौगाट ने अपनी बेटी गीता और बबीता के बाल कटवा दिए

विशाल एंग्रीश, न्यूज 24, चंडीगढ़ (17 अक्टूबर): महिला कुश्ती का नाम सुनते ही आपके जहन में दंगल फिल्‍म का नाम जरूर आता होगा, बेटियां बाल संवारने में न लगी रही और बाल मिट्टी में खराब न हों, इसलिए महाबीर फौगाट ने अपनी बेटी गीता और बबीता के बाल कटवा दिए। मगर हरियाणा हांसी के गांव उमरा में भी महिला कुश्‍ती पहलवानों ने अपने सिर के बाल पूरी तरह से ही मुंडवा लिए। इसके लिए न ही इन पहलवानों पर किसी ने दबाव बनाया और न ही इन पहलवानों के बापू हानिकारक हैं।आप सोच रहें होंगे कि फिर वजह क्‍या रही, वजह है खेल के प्रति इनका जुनून। जी हां इन महिला पहलवानों ने बताया कि खेलते समय राउंड के बीच में 30 सेकेंड का समय मिलता है। इस दौरान बाल बड़े हो तो उन्‍हें ठीक करने में ही 30 सेकेंड निकल जाते हैं और कोच द्वारा बताए जाने वाले ट्रिक से ध्‍यान भटक जाता है।  बालों के कारण ऐसा न हो इसलिए हम सभी ने सिर के बाल मुंडवाने का फैसला लिया।

कुश्ती में बेहतर प्रदर्शन के लिए हांसी के उमरा गांव की 30 बेटियों ने मुंडन करा लिया। उनका मानना है कि 3-3 मिनट के मुकाबले में मिलने वाले 30 सेकंड के रेस्ट में वे बालों को सुलझाने में ही लगी रहती थीं। इतने कम वक्त में उन्हें कूल और रिफ्रेश होने का वक्त नहीं मिल पाता था। मैच के दौरान भी चोटी और बड़े बाल बाधा बनते थे। महिला खिलाड़ियों की इस तकनीकी सोच के बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। कोच संजय ने बताया कि गांव के गुरु हवासिंह अखाड़े में फिलहाल 30 लड़कियां कुश्ती का अभ्यास कर रही हैं। इनमें से ज्यादातर ने सिर मुंडवा रखे हैं, जो बची गई हैं उनके बाल भी छोटे ही हैं।

आपको बता दें कि गांव की चार बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। रेसलर मंजू ने 2016 में सीनियर कॉमनवेल्थ सिंगापुर में 58 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड और प्रो रेसलिंग में भी मेडल जीता था। वहीं, मोनिया 2018 में दक्षिण अफ्रीका में कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीत चुकी है। 100 से ज्यादा बच्चों ने नेशनल लेवल पर मेडल जीते हैं। अखाड़ा प्रमुख हवासिंह, कोच संजय , विक्रम और कर्मवीर उन्हें कुश्ती के दाव सिखाते हैं।

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