''हरमनप्रीत कोई हरभजन सिंह नहीं हैं कि हम उन्हें नौकरी दे दें''

नई दिल्ली ( 23 जुलाई ): आईसीसी महिला विश्वकप 2017 के सेमीफाइनल में हरमनप्रीत ने तूफानी पारी खेली थी। हरमनप्रीत की तूफानी पारी की बदौलत भारत फाइनल में पहुंचने में कामयाब हो गया। हरमनप्रीत कौर को एक समय पंजाब सरकार ने नौकरी देने से मना कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 2010-11 में जब हरमनप्रीत को नौकरी की जरूरत थी तब पंजाब सरकार ने पुलिस में उनकी नौकरी की अर्जी को नकार दिया था। यह तब था जब उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दो साल का वक्त बीच चुका था।

मीडिया रिपोर्ट में हरमनप्रीत के कोच यादविंदर सिंह सोढ़ी के हवाले से कहा गया है कि 'हमने पंजाब पुलिस को संपर्क किया और उनसे हरमन को नौकरी देने का आग्रह किया। वह तब भारतीय महिला टीम की नियमित सदस्य थी। हमें बताया गया कि पंजाब पुलिस में महिला क्रिकेटरों को नौकरी देने का कोई प्रावधान नहीं है।' 'मुख्यमंत्री से भी मिले लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ' सोढ़ी बताते हैं कि पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था, 'वह (हरमनप्रीत कौर) कोई हरभजन सिंह थोड़े ही न है जिसे हम डीएसपी बना दें।' 

उन्होंने बताया कि हरमनप्रीत को इंस्पेक्टर तक नहीं बनाया गया। हम मुख्यमंत्री से भी मिले लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।' हरमनप्रीत के पिता ने बताया है कि 2009 से हरमनप्रीत भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, लेकिन किसी भी राजनीतिक पार्टी का सदस्य उनके घर नहीं आया। आपको बता दें कि हरमनप्रीत को पूर्व भारतीय लीजेंड क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की सहायता से रेलवे में नौकरी मिली है। हरमनप्रीत कौर को चार साल पहले सचिन तेंडुलकर की सिफारिश पर रेलवे में नौकरी मिली थी।