जॉब मांगने पर इस महिला क्रिकेटर की पंजाब सरकार ने की थी बेइज्जती

चंडीगढ़ (23 जुलाई): भारतीय महिला क्रिकेट टीम की हरफनमौला खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर आज युवाओं के लिए रोल मॉडल बन गई है। हर भारतीय की चहेती बन गई हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में 115 गेंदों पर शानदार 171 रनों की पारी खेलकर टीएम इंडिया को महिला विश्व कप के फाइनल में पहुंचाने वाली हरमनप्रीत पर इनामों की बारिश हो रही है। BCCI ने भी हर महिला खिलाड़ी के लिए 50 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है। लेकिन पंजाब के मोगा की रहने वाली हरमनप्रीत के लिए ये सब इतना आसान भी नहीं था।

एक दौर वो भी था जब हरमनप्रीत को एक अदद नौकरी की सख्त जरूरत थी। लगातार दो साल से टीम इंडिया के लिए खेल रही हरमनप्रीत ने पंजाब सरकार से पुलिस में नौकरी के लिए आवेदन किया। लेकिन पंजाब पुलिस ने उन्हें  यह कह कर नौकरी देने से इनकार कर दिया की वो कोई हरभजन सिंह थोड़े ही है। हरमनप्रीत ने राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से भी मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हरमनप्रीत को इंस्पेक्टर तक नहीं बनाया गया।  

हरमनप्रीत के कोच यादविंदर सिंह सोढ़ी  2010-11 के उस वक्त को याद करते हुए बेहद भावुक होते हुए कहते हैं वो अब उस वक्त की चर्चा नहीं करना चाहते। वहीं हरमनप्रीत के का कहना है कि  2009 से हरमनप्रीत भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं लेकिन किसी भी राजनीतिक पार्टी का सदस्य हमारे घर नहीं आए। अकाली दल या कांग्रेस सरकार कम से कम इतना तो कर ही सकते थे कि हरमन को नौकरी दे देते।