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जन्मदिन पर नहीं मिल सका हरीश रावत को 'बर्थ-डे गिफ्ट'

संजीव त्रिवेदी, नई दिल्ली (27 अप्रैल): ये खबर है पहाड़ की सियासत की। आज हरीश रावत का जन्मदिन था। लेकिन उन्हें बर्थडे गिफ्ट नहीं मिला। क्योंकि उत्तराखंड में अब बहुमत का परीक्षण 29 अप्रैल को नहीं होगा।  नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक को जारी रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगले मंगलवार को फिर सुनने का फैसला किया। साथ ही केंद्र से सवाल भी किया, कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए आखिर केंद्र के पास आधार क्या था? 

पहाड़ पर हरीश रावत की कांग्रेस सरकार या राष्ट्रपति शासन, क्या ये सस्पेंस खत्म होगा, इसलिए सबकी निगाह सुप्रीम कोर्ट पर लगी थी। जहां लंबी बहस हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के लिए कुछ सवाल तैयार कर रखे थे जो राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले के उपर सवाल की तरह थे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जानना चाहा

1- क्या विधानसभा की कार्रवाई का संज्ञान राष्ट्रपति आर्टिकल 356 के तहत ले सकता है? 2- क्या विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से विधायकों की सदस्यता रद्द करने का फैसला राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार बन सकता है ? 3-  विनियोग विधेयक का स्तर क्या था और राष्ट्रपति का इस संबंध में क्या रोल है ?  4-  फ्लोर टेस्ट में देरी क्या राष्ट्रपति शासन का आधार बनता है ?  5- क्या राज्यपाल 175(2) के तहत फ्लोर टेस्ट के लिए कह सकते हैं ?  6-  लोकतंत्र कुछ स्थायी मान्यताओं पर आधारित होता है। लोकतंत्र को अस्थिर मानने के मानक क्या हैं ? 

इन सवालों के जवाब  देने के लिए अदालत ने केंद्र को वक्त दिया। लेकिन  केन्द्र सरकार की तरफ़ से पेश एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अदालत से साफ़ कहा किया किसी भी सवाल से ज्याद अहम ये है कि या तो राष्ट्रपति शासन लगाये जाने के फ़ैसले को सही क़रार दिया जाए या ग़लतउन्होंने कहा कि ये सही फैसला इसीलिए है क्योंकि राष्ट्रपति के विवेकानुसार राज्य में विधायकों की खरीद फरोख्त चल रही थी।

केंद्र स्टिंग आपरेशन को को हरीश रावत के  खिलाफ अपना सबसे मजबूत सबूत मान रहा है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इस दलील को तब खारिज कर दिया जब अदालत ने केंद्र से पूछा कि ये एक नैतिक मसला तो हो सकता है और अगर सरकार चाहती तो मुक़दमा भी दर्ज कर सकती थी लेकिन क्या स्टिंग ऑपरेशन राष्ट्रपति शासन लगाने की वजह हो सकता है ? हरीश रावत का पक्ष की तरफ से ये बार-बार कहा गया कि जब राज्यपाल ने  तय करने के लिए फ़्लोर टेस्ट कराने को कहा था तो कैसे 36 घंटे पहले केन्द्र सरकार को राष्ट्रपति शासन लगाने की जरुरत पड़ गयीइस सवाल पर केंद्र की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया हालांकि अदालत ने भी केंद्र से ये जानना चाहा कि अगर बहुमत अल्तपमत का फैसला सदन के पटल पर हो तो क्माया सही नहीं होगा ?

अगली सुनवाई मंगलवार को शुरु होगी जो बुधवार तक चलेगी।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा इसके बाद फैसला गर्मियों की छुट्टी से पहले सुना दिया जाएगा ... अदालत राष्ट्रपति शासन से ज्यादा बहुमत परिक्षण को अहमियत देती दिखी लेकिन  तय यही किया कि फैसले तक राज्य में राष्ट्रपति शासन ही कायम रहेगा। 


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