जाकिर नाईक को मलेशिया ने दी शरण, यह है राजनीतिक वजह

नई दिल्ली ( 2 नवंबर ): विवादित इस्लामिक उपदेशक और भड़काऊ भाषणों के लिए मशहूर जाकिर नाईक को मलेशिया ने अपने यहां शरण दे दी है। कुछ दिन पहले उसे एक प्रमुख मस्जिद में देखा गया। प्रशंसकों ने उसके साथ तस्वीरें खींचने की कोशिश की। अपने बॉडीगार्ड के साथ नाईक मलयेशिया की प्रशासनिक राजधानी की जिस 'पुत्र मस्जिद' में जनता के सामने आया था, वहां प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट के कई मंत्री अक्सर नमाज पढ़ने आते हैं। यह सब ऐसे समय हो रहा था जब इस भारतीय मुस्लिम उपदेशक के खिलाफ भारत में आपराधिक जांच चल रही है। हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग मामले में एनआईए ने विशेष अदालत में नाईक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

गौरतलब है कि यूके सरकार ने नाईक पर बैन लगा रखा है। जबकि मलयेशिया में उसे स्थायी ठिकाना मिल चुका है। यहां के टॉप सरकारी अधिकारी भी उसे काफी तवज्जो देते हैं। ऐसे में यह जानना काफी दिलचस्प है कि एक विवादित इस्लामिक उपदेशक की मलयेशिया में मेहमाननवाजी का कारण क्या है?

जाकिर को मलेशिया में नागरिकता मिलना इस बात का प्रमाण माना जा रहा कि वहां की सरकार कट्टर इस्लाम को बढ़ावा देने की कोशिशों में है। यह काम वहां पीएम नजीब रज्जाक की सरकार आने के बाद शुरू हुआ है।

आलोचकों का कहना है कि मलयेशिया में नाईक का होना इस बात का संकेत है कि देश में कट्टर इस्लाम को उच्च स्तर पर समर्थन मिल रहा है। देश में ईसाई, हिंदू और बौद्ध अल्पसंख्यक हैं और देश की उदार इस्लामिक छवि रही है। पीएम नजीब रज्जाक के कार्यकाल में हाल के वर्षों में मलेशिया में इस्लाम का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। खासतौर से 2013 के आम चुनाव के बाद, जब रज्जाक ने पॉप्युलर वोट खो दिया था। सत्तारूढ़ गठबंधन का यह सबसे खराब चुनावी प्रदर्शन था। 

इसके बाद से रज्जाक की सत्तारूढ़ पार्टी कंजरवेटिव जातीय मलय-मुस्लिम बेस को बढ़ाने के लिए तुष्टीकरण करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में चुनावों से पहले धर्म एक नया जंग का मैदान बन गया है। मलेशिया में 2018 के मध्य में चुनाव होने वाले हैं। 

52 वर्षीय मेडिकल डॉक्टर जाकिर नाईक पर मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ की तरफ ले जाने के लिए भड़काऊ प्रवचन देने का आरोप है। नाईक के एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) पर भारत सरकार ने रोक लगा रखी है। वह पिछले साल गिरफ्तारी से बचने के लिए भारत छोड़कर चला गया था। जब ढाका आतंकवादी हमले के कुछ हमलावरों ने दावा किया था कि वे नाईक से प्रेरित थे। बांग्लादेश में पीस टीवी चैनल पर बैन है, जिस पर उसके विवादित प्रवचन प्रसारित होते रहते हैं। नाईक ने ओसामा बिन लादेन का भी समर्थन किया था।

मलयेशिया सरकार का यह है कहना इस बीच मलयेशिया के डेप्युटी पीएम अहमद जाहिद हमीदी ने संसद को जानकारी दी है कि नाईक को 5 साल पहले पर्मानेंट रेजिडेंसी दी गई थी। उन्होंने आगे कहा कि नाईक को विशेष सुविधा नहीं दी गई है। जाहिद ने आगे तर्क रखा, 'देश में समय बिताने के दौरान नाईक ने किसी कानून को नहीं तोड़ा। ऐसे में कानून की नजर में उन्हें हिरासत या गिरफ्तार करने की कोई वजह नहीं है।'