'परेशान' CISF जवान हाई कोर्ट पहुंचे


नई दिल्ली(3 अप्रैल): सीआईएसएफ के जवान अपनी दिक्कतों की शिकायत पीएम को पत्र को लिखकर बता चुके हैं। लेकिन, अब बेंगलुरु के केम्पे गोडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा में तैनात 200 जवानों ने उत्पीड़न के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया है।


-  गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते 3 सालों में 344 अर्ध सैनिक बलों के जवानों ने आत्महत्या कर ली। इनमें से 15 लोगों ने इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ही मौत को गले लगा लिया।


- आंकड़ों के मुताबिक आत्महत्या करने वाले जवानों में से 15 पर्सेंट यानी 53 जवान सीआईएसएफ के थे। इसके अलावा 25 मामले ऐसे रहे हैं, जिसमें जवानों ने अपने ही सहकर्मियों की हत्या कर दी या फिर उन पर फायरिंग कर दी। ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों में 13 जवान सीआईएसएफ के ही थे।


-इसी साल जनवरी में केम्पे गोडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर एक जवान ने अपनी ही सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी। इस पर सीआईएसएफ और स्थानीय पुलिस ने कहा था कि जवान ने निजी कारणों से आत्महत्या कर ली थी।


-  केम्पे गोडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर खराब व्यवस्थाओं को लेकर एक सीआईएसएफ कर्मी ने कहा, 'खाने का स्टैंडर्ड बेहद खराब है। हमारी शिफ्ट्स में कोई ब्रेक नहीं होता। हमें घर नहीं मिलता है और ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी नहीं मिलता है। सीनियर्स द्वारा दुर्व्यवहार होता है और मनमाने ढंग से सैलरी भी काट ली जाती है।'