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बर्थडे स्पेशल: पत्रकार से अभिनेत्री बनने तक का सफर 'जीनत अमान' ने ऐसे निभाया

अर्जुन कपूर और सजंय दत्त की आने वाली फ़िल्म पानीपत आजकल सुर्खियों में हैं। ज़ीनत अमान को भी इस फिल्म में देखा जाएगा।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (19 नवंबर):  अर्जुन कपूर और सजंय दत्त की आने वाली फ़िल्म पानीपत आजकल सुर्खियों में हैं। ज़ीनत अमान को भी इस फिल्म में देखा जाएगा। एक दौर था जब ज़ीनत बॉक्स ऑफ़िस पर सक्सेस की गांरटी हुआ करती थी। उन्होंने उस दौर में देवानंद, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और ऋषि कपूर समेत तमाम बड़े सितारों के साथ काम किया। ज़ीनत आज अपना 68वां जन्मदिन मना रही है। 

जीनत अमान का जन्म 19 नवंबर 1951 को जर्मनी में हुआ। उनके पिता अमान उल्लाह ने मुगल-ए-आजम और पाकीजा जैसी सुपरहिट फिल्मों में बतौर लेखक काम किया था। लेकिन महज 13 साल की उम्र में जीनत के सिर से पिता का हाथ उठ गया था। तब उनकी मां उन्हें जर्मनी लेकर चली गई लेकिन लगभग 5 साल तक जर्मनी में रहने के बाद महज 18 साल की जीनत मुंबई आ गईं।

मुंबई आने के बाद जीनत ने सेंट जेवियर कॉलेज से बैचलर्स की पढ़ाई पूरी की, फिर आगे की पढ़ाई करने के लिए वो अमेरिका के मशहूर कॉलेज कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी चली गईं। जीनत ने अपने करियर की शुरुआत मशहूर मैगजीन 'फेमिना' से बतौर जर्नलिस्ट से की लेकिन बहुत जल्द उन्होंने ये लाइन छोड़ा दी। और फिर क्या था वो मॉडलिंग की फील्ड में उतर गईं।

मॉडलिंग में सक्रिय होने के बाद जीनत अमान ने मिस इंडिया पैसिफिक का खिताब जीता। जिसके बाद जीनत अमान ने बॉलीवुड में कदम रखा, बॉलवुड करियर की शुरुआत साल 1971 में ओपी रल्हन की फिल्म 'हलचल' से हुई थी।1971 में ही उन्हें एक बार फिर से ओपी रल्हन के साथ फिल्म 'हंगामा' में काम करने का मौका मिला। हालांकि दोनों ही फिल्में खासा कमाल नहीं कर पाई। 

1971 में ही उनको फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' मिली। इस फिल्म में उन्होंने देवानंद की बहन की भूमिका निभाई थी। फिल्म में दमदार एक्टिंग के लिए जीनत अमान को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड से नवाजा गया था।

वहीं उनके कुछ गाने भी है जो बहुत मशहुर हुए थे, गाना दम मारो दम गाना तो आपको याद ही होगा। यह वह गाना है, जिसने एक जर्नलिस्ट को फ़िल्मी दुनिया का सितारा बना दिया। जर्नलिज्म का करियर छोड़कर आईं ज़ीनत की शुरुआती फ़िल्में फ्लॉप रहीं। 

दम मारो दम के बाद ज़ीनत का करियर सांतवे आसमान पर चल पड़ा। एक के बाद एक फ़िल्में आने लगीं और चलने लगीं। इस बीच उन्होंने साल 1973 में 'यादों की बारात' मिली। इसमें वह एक बार फिर सेकंड लीड रोल में नजर आई थी। ज़ीनत को एक और मुकाम तब मिला, जब उनके हिस्से 'रोटी कपड़ा और मकान' आई। यह फ़िल्म उस समय की ब्लॉकबस्टर रही।

अस्सी का दौर आते-आते ज़ीनत अपने स्टारडम के शिख़र पर पहुंच चुकी थीं। इस दौरान अमिताभ के साथ 'लावारिस 'की, फ़िरोज़ ख़ान के साथ 'कुर्बानी' और धर्मेंद्र के साथ 'प्रोफेसर प्यार लाल' जैसी शानदार फ़िल्में कीं। कभी फ़िल्मी दुनिया के ग्लैमर के समानांतर खड़ी ज़ीनत उम्र के इस पड़ाव पर भी काम कर रही हैं। अगले महीने आ रही 'पानीपत' में उनकी एक्टिंग का जलवा देखने को मिलेगा।

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