हाफिज सईद की गिरफ्तारी पर भारत का बयान, उम्मीद है इस बार कुछ अच्छा होगा

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(18 जुलाई):  बुधवार को जमात-उत-दावा के मुखिया हाफिज सईद को लाहौर में गिरफ्तार किया गया। टेरर फंडिंग के केस में पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने उसकी गिरफ्तारी की। इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से प्रतिक्रिया आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान का यह कदम पहले के उठाये गए कदमों से अलग है। भारत को उम्मीद है कि हाफिज सईद को इस बार उसके किए की सजा जरूर मिलेगी।

रवीश कुमार ने कहा कि ऐसा लंबे से हुआ है कि भारत में जब कभी भी आतंकी वारदात हुई है तो हाफिज सईद को गिरफ्तार, नजरबंदी और रिहाई हुई है। जहां तक उन्हें याद है कि 2001 से अब तक आठ बार हाफिज की गिरफ्तारी और रिहाई हुई है। उन्होंने कहा कि भारत की तरफ से हाफिज के अपराधों के बारे में सबूतों के साथ जानकारी साझा की है। जहां तक पाकिस्तान के रवैये का सवाल है उसकी पोल खुलती जा रही है।

हाफिज सईद की गिरफ्तारी के बारे में इस तरह की खबरें आईं की इमरान खान 21 जुलाई को अमेरिका जाने वाले हैं, लिहाजा ट्रंप प्रशासन को खुश करने के लिए इस तरह की कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही ये भी कहा गया कि पाकिस्तान फाटा की ग्रे लिस्ट में है और फाटा ने साफ कर दिया है कि अगर आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान कड़ी कार्रवाई नहीं करता है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा। इसका अर्थ है कि पहले से आर्थिक दुश्वारियों का सामना कर रहे पाकिस्तान को और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

हाफिज को अमेरिका ने 2014 में अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया था। अमेरिकी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनता रहा। लेकिन सच ये भी है कि हाफिज अपने कुटिल चालों के जरिए भारत में तबाही की कहानी लिखता रहा। हाफिज की चालों को इस बात से भी समझा जा सकता है कि लश्कर-ए-तैयबा पर बैन लगने के बाद उसने अपने संगठन का नाम बदल लिया। फलह-ए-इंसानियत जैसी धार्मिक संस्था की आड़ में वो इमदाद जैसे कामों को आगे बढ़ाने का दावा करता रहा। लेकिन हकीकत में ये देखने को मिला कि जरूरतमंदों को मदद पहुंचाना तो सिर्फ बहाना था।