पाकिस्तान में भी होती है इस संत की पूजा, कोर्ट ने भी स्वीकारा था इनकी योग की शक्ति

नई दिल्ली(24 जुलाई):  ब्रह्मआश्रम सह विद्यालय के संस्थापक गुरु परमहंस दयाल जी अद्वैतानंद जी महाराज की भक्ति की चर्चा पाकिस्तान में होती रही,  लेकिन इनको उनके शहर के लोग ही नहीं जानते। महाराजगंज से बीजेपी सांसद जर्नादन सिंह सिग्रीवाल ने लोकसभा के मानसूत्र सत्र में पाकिस्तान में मौजूद संत के क्षतिग्रस्त मंदिर के पुनः निर्माण की पहल करने की मांग उठाकर उन महायोगी संत को देश ही नहीं विश्वपटल पर ले आया है।

इनकी भक्ति और योग की शक्ति को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वीकार किया था। कोर्ट ने 4 अप्रैल 2015 को अपने एक आदेश में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के कारक जिला के टेरी में चरमपंथियों द्वारा क्षतिग्रस्त उनकी समाधि पर बने मंदिर को प्रशासनिक देखरेख में पुनः निर्माण कराने को कहा था। इस आदेश के बाद भी पाकिस्तान सरकार ने संत के मंदिर निर्माण में रुचि नहीं दिखाई।

स्वामी जी का जुड़ाव छपरा शहर से है। करीब 170 वर्ष पूर्व यहीं के दहियावां मुहल्ले के एक ब्राह्मण परिवार में उनका जन्म 1846 ई. में हुआ था। जन्म के आठ माह बाद माता और पांच वर्ष बाद पिता तुलसीनाथ पाठक का देहांत हो गया था। यहीं से वैराग्य पथ पर अग्रसर संत देश के विभिन्न भागों का भ्रमण कर पाकिस्तान के टेरी पहुंचे थे। वर्षों तक लोगों के बीच योग क्रिया का ज्ञान बांटते रहे और वहीं समाधि ले ली। भक्तों ने उनके समाधिस्थल पर ही एक मंदिर का निर्माण कर दिया। यह मंदिर 1997 तक यथावत रहा। यहां गुरू परमहंस दयाल जी के पंथ के हजारों अनुयायी दर्शन व आशीर्वाद के लिए नियमित पहुंचते रहे। इसी बीच चरमपंथियों ने मंदिर पर हमला कर उसे बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।