खाड़ी देशों में तनाव, बढ़ेगी भारत परेशान

नई दिल्ली (5 जून): भारत लगातार अरब देशों के साथ अपने रिश्ते को मजबूत नीति पर काम कर रहा है। लेकिन गल्फ देशों में बढ़ते तनाव और विवाद की वजह से भारत की भी मुश्किलें बढ़ गई है। सऊदी अरब के अलावा बहरीन, इजिप्ट, यूएई ने भी कतर से अपने संबंध तोड़ लिए हैं। चारों देशों ने कतर पर आरोप लगाया है कि वो आतंकियों को मदद कर रहा है। चारों देशों ने अपने यहां रह रहे कतर के नागरिकों को देश छोड़ने का ऐलान कर दिया है। वहीं कतर ने भी इसी तरह के कदम उठाए हैं। कतर एलएनजी का सबसे बड़ा विक्रेता है, वहीं देश से क्रूड का एक्सपोर्ट भी होता है। मार्केट को आशंका है कि कतर के साथ विवाद बढ़ने की है कि कतर के साथ विवाद बढ़ने की आशंका है जिससे क्रूड पर असर देखने को मिल सकता है। हाल ही में ओपेक ने क्रूड ऑयल के प्रोडक्शन में कटौती में कटौती की सीमा को अगले साल तक बढ़ाने की मंजूरी दी थी। कतर और सऊदी अरब दोनों ही ओपेक के सदस्य हैं।

गल्फ देशों के बीच जारी इस विवाद में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी देखा जा रहा है कि इसका असर भारत पर भी पड़ना तय है। भारत सबसे ज्यादा तेल सउदी अरब से लेता है जबकि कतर से भारत सबसे ज्यादा प्राकृतिक गैस लेता है। ऐसे में यहां तनाव फैलने पर कच्चे तेल की कीमतों पर असर होगा जिसका बोझ भारत की आम जनता व यहां की अर्थव्यवस्था को भी उठाना पड़ेगा।

इतना ही नहीं खाड़ी के देशों में सबसे ज्यादा भारतीय काम करते हैं. सिर्फ UEA में 20 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं। पांच लाख से ज्यादा भारतीय कतर जैसे छोटे देश में काम करते हैं। ऐसे में खाड़ी देशों में तनाव से इनके कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका है। मोदी सरकार खाड़ी के देशों के साथ लगातार अपने रिश्तों को मजबूत करने में जुटी है। पीएम मोदी लगातार इन हिस्से के विभिन्न देशों की यात्रा भी कर रहे हैं। भारत ईरान के साथ इसके विरोधी देश सउदी अरब के साथ भी रिश्ते को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। जाहिर है कि नये हालात भारत के लिए कूटनीतिक मुश्किलें पैदा करेंगे।