खाड़ी देशों में कमाना नहीं आसान, हर दिन 10 भारतीय गंवा रहे हैं अपनी जान !


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (9 नवंबर): भारतीयों में खाड़ी देशों में जाकर कमाने का काफी क्रेज है। लेकिन वहीं कमाना इतना भी आसान नहीं है। एक RTI से मिली जानकारी के मुताबिक
खाड़ी देशों में रोजगार की तलाश में गए 10 भारतीय हर रोज जान गंवा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता वेंकटेश नायक के RTI इंटरवेंशन ऐंड रिसर्च के मुताबिक 2012 से 2018 के बीच बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात में 24,570 इंडियन वर्कर्स की मौत हुई है। सबसे ज्यादा 10,416 मौतें सऊदी अरब में हुई हैं जबकि इस लिस्ट में 1,317 के साथ सबसे नीचे बहरीन रहा है। साल के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा मौतें 2015 में हुईं, जब 4,702 वर्कर्स की जान गई, 2012 में सबसे कम 2,375 का आंकड़ा रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक 2012 से मध्य 2018 तक छह खाड़ी देशों में कम से कम 24,570 भारतीयों की मौत हुई। अगर पूरी मौत के आकड़ों को संगठित करें तो इन 6 वर्षो में हर रोज 10 से ज्यादा भारतीय मजदूरों ने खाड़ी देशों में अपनी जान गंवाई है। इस दौरान भारत को पूरी दुनिया भर से 410.33 अरब डॉलर की राशि प्राप्त हुई है जिसमें से अकेले खाड़ी देशों से आना वाला पैसा ही 209.07 अरब डॉलर है, यानि की आधे से भी थोड़ा ज्यादा। दरअसल कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के वेंकटेश नायक ने विदेश मंत्रालय से बहरीन, ओमान, कतर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में 1 जनवरी 2012 से मध्य 2018 तक हुई भारतीय मजदूरों की मौत का ब्योरा मांगा था।

वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक, खाड़ी देशों में यूएई से सबसे ज्यादा $72.30 अरब की रकम इंडिया भेजी गई, जबकि सऊदी अरब $62.60 अरब के साथ दूसरे नंबर पर रहा। लिस्ट में इनके बाद कुवैत ($25.77 अरब); कतर ($22.57 अरब); ओमान ($18.63 अरब) और बहरीन $7.19 अरब रहा। खाड़ी देशों में काम करने वाले इंडियन वर्कर्स की मौत से जुड़े जो आंकड़े आरटीआई के जरिए मिले हैं, उनकी तुलना संसदीय आंकड़ों से किए जाने पर पता चला कि 2012-17 के दौरान ओमान में कमाए हर एक अरब डॉलर पर 187 भारतीय श्रमिकों जान गई। इस दौरान बहरीन से 1 अरब डॉलर कमाकर भारत भेजने वालों में 183 ने परदेस में जान गंवा दी, जबकि सऊदी अरब में भारतीयों की हर 1 अरब डॉलर की कमाई पर 162 वर्कर की मौत का आंकड़ा सामने आया।

जहां तक कतर की बात है, तो वहां से एक अरब डॉलर कमाकर इंडिया भेजने वाले 74 वर्कर्स की मौत हुई, जबकि यूएई में हर 1 अरब डॉलर की कमाई में 71 भारतीयों की जान गई। 2012-17 में इंडियन वर्कर्स की तरफ से स्वदेश भेजी गई सर्वाधिक रकम $72.3 अरब रही, लेकिन वहां हर 1 अरब डॉलर के रेमिटेंस के मुकाबले मरने वाले भारतीय श्रमिकों की संख्या सबसे कम 71 रही। प्रति एक अरब डॉलर रेमिटेंस के मुकाबले मौतों के मामले में बहरीन 183 के आंकड़े के साथ दूसरे नंबर पर रहा।