तीस्ता सीतलवाड़ को लेकर गुजरात पुलिस का SC में बड़ा दावा

नई दिल्ली(2 दिसंबर): सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति ने 2002 दंगा पीड़ितों की मदद के लिए अपने एनजीओ को मिले 9.75 करोड़ रुपयों में से 3.85 करोड़ रुपये निजी कार्यों में खर्च किए। गुजरात पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में यह दावा करते हुए कहा कि उसके पास इस बात के दस्तावेजी प्रमाण हैं।

- 83 पन्नों के ऐफिडेविट में एसीपी राहुल पटेल ने कोर्ट को विस्तार से बताया कि सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद के साथ-साथ उनके ट्रस्टों सेंटर फॉर जस्टिस ऐंड पीस (सीजेपी) और सबरंग ने शिकायतों की जांच के लिए जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने में बिल्कुल मदद नहीं की। 

- ऐफिडेविट में कहा गया है कि पुलिस ने गुलबर्ग सोसायटी के दंगा पीड़ितों की उन शिकायतों की जांच के लिए जरूरी दस्तावेज मांगे थे जिनमें सीतलवाड़ और उनके पति पर आरोप लगाया गया था कि उनके पास चंदे की राशि जमा हो गई तो दोनों वादे के मुताबिक दंगा पीड़ितों को मदद से मुकर गए।

- सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद की अग्रिम जमानत याचिका गुजरात हाई कोर्ट से खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दोनों की गिरफ्तारी से रोक लिया, लेकिन दोनों को जांच के लिए जरूरी दस्तावेज पुलिस को सौंपने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के अलावा दोनों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का भी दरवाजा यह कहते हुए खटखटाया था कि गुजरात पुलिस ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए षडयंत्रकारी अभियान छेड़ रखा है। गौरतलब है कि सीतलवाड़ ने 2002 के दंगा पीड़ितों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को मनाने में सफलता पा ली जो दंगे की नौ भयावह घटनाओं की जांच करे।

- गुजरात पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि उसने 2007 से 2014 तक सीतलवाड़ और उनके पति के साथ-साथ सीजेपी, सबरंग के बैंक खातों की जांच की। पुलिस के मुताबिक, दोनों एनजीओज को इस दौरान देश और विदेश से कुल 9.75 करोड़ रुपये के दान मिले। पुलिस का दावा है कि सीतलवाड़ और उनके पति ने दान की इस रकम में से 3.85 करोड़ रुपये का इस्तेमाल व्यक्तिगत खर्चों पर किया। पुलिस ने बताया कि 1 जनवरी 2001 को दोनों ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की मुंबई शाखा में दो अकाउंट्स खुलवाए जिनमें 31 दिसंबर 2002 तक पैसे जमा नहीं किए गए थे। लेकिन, जनवरी 2003 से लेकर दिसंबर 2013 के बीच आनंद ने 96.43 लाख रुपये जबकि सीतलवाड़ ने 1.53 करोड़ रुपये अपने-अपने अकाउंट में जमा कराए।

- पुलिस का आरोप है कि फरवरी 2011 से जुलाई 2012 के बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 1.40 करोड़ रुपये का फंड दिया। दोनों ने इसमें से पैसे निकालकर व्यक्तिगत खर्चों पर इस्तेमाल किए। पुलिस ने कहा कि शुरू में उसे सीजेपी और सबरंग के महज तीन खातों की ही जानकारी मिली थी। पुलिस के मुताबिक, '23 जनवरी 2014 को जैसे ही तीनों खाते सीज हुए, सीतलवाड़ और उनके पति ने तुरंत सबरंग ट्रस्ट के अन्य दो अकाउंट्स से डिमांड ड्राफ्ट के जरिए एक ही दिन में 24.50 लाख और 11.50 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इन दोनों अकाउंट्स की जानकारी जांचकर्ता को नहीं थी।'

- पुलिस का आरोप है कि 'दोनों ने सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्टों से यह बात छिपाई कि बैंक खाते सीज होने के बाद दोनों ने दूसरे बैंक में सबरंग ट्रस्ट जनरल अकाउंट और सबरंग ट्रस्ट एचआरडी अकाउंट के नाम से अलग-अलग खाते खुलवा लिए।' पुलिस का दावा है, '2007 से पहले सीजेपी और सबरंग ट्रस्ट के अकाउंट्स में नाम मात्र की रकम जमा थी। इन अकाउंट्स में पूरी दुनिया से पैसे तब आने शुरू हुए जब याचिकाकर्ता-आरोपी (सीतलवाड़ और आनंद) ने अपनी वेबसाइट्स के साथ-साथ न्यूजलेटर्स, इंटरव्यूज, सीडीज आदि के जरिए दंगा पीड़ितों को बचाने और उनका पुनर्वास करने के साथ-साथ एक 'म्यूजियम ऑफ रेजिस्टेंस' स्थापित करने के लिए फंड की बहुत जरूरत है।'

- पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में सीतलवाड़ के उस दावे को भी गलत ठहराने की कोशिश की है कि बड़े-बड़े वकीलों दंगे से संबंधित ज्यादातर केस की मुफ्त में ही वकालत की। पुलिस ने कहा, 'यह पता चल गया है कि विभिन्न वकीलों को उनकी लीगल फीज के रूप में 71.40 रुपये से ज्यादा पैसे दिए गए।' तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद को कस्टडी में रखकर पूछताछ करने की अनुमति मांगते हुए पुलिस ने कहा, 'दोनों ने ट्रस्टों में जमा फंड के बड़े हिस्से का बड़ी चतुराई से गलत इस्तेमाल किया और अपने पर्सनल अकाउंट्स में ट्रांसफर कर लिया।'