गुजरात सरकार ने रोका किसानों का पानी

भूपेंद्र सिंह, अहमदाबाद (27 मार्च): गुजरात में अहमदाबाद के आस-पास के किसानों पर जलसंकट मंडरा रहा है। ये किसान अपनी फसलों के लिए बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। फसल की बुवाई तो कर दी है, लेकिन सींचने के लिए पानी नहीं मिल रहा है।

इस संकट के पीछे गुजरात सरकार का वो आदेश बताया जा रहा है, जिसमें 15 मार्च के बाद सिंचाई के पानी को रोकने का आदेश दिया गया था और जिसके बाद से किसानों को सिंचाई का पानी तक नसीब नहीं हो रहा। किसानों को समझ नहीं आ रहा वो फसल बचाए तो कैसे बचाएं।

चिंता की सबसे बड़ी बात तो ये हैं कि जिस गुजरात में पानी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए सरदार सरोवर डैम का उद्घाटन किया गया था, उसके कुछ महीनों बाद ही गुजरात सूखे और पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। जलाशयों में पानी का स्तर हाल के सालों में सबसे नीचे है। हालत ये है की गर्मी की फसल बिना पानी के बर्बाद हो रही है।

चौंकाने वाली बात तो ये है कि अहमदाबाद शहर के रिवरफ्रंट में पानी लबालब भरा दिखाई देता है, लेकिन वहीं से महज चंद दूरी के गांवों में किसानों को एक बूंद पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा। वजह सरकार के उस आदेश को बताया जा रहा है, जिसमें नर्मदा नहर से छोड़ा जाने वाले 400 क्यूसेक सिंचाई का पानी 15 मार्च से बंद कर दिया जाएगा, लेकिन हद तो तब हो गई जब ज्यादातर जगहों पर 15 मार्च के पहले ही पानी बंद कर दिया गया।

नतीजा ये हुआ कि जो किसान सिंचाई के लिए पानी स्टोरेज करने वाले थे वो पानी का स्टोरेज तक नहीं कर पाए। अब हालत ये हो गई है कि अपनी फसल बचाने के लिए पानी के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं नहीं तो कहीं जुगाड़ से ही काम चलाना पड़ रहा है।

अहमदाबाद के आस पास के साणंद, धोलका, फांगाडी इलाके जो चावल की खेती के लिए मशहूर है वो पूरा इलाके पानी के लिए तरस रहा है। सभी नहर नाले सूखे चुके हैं ऐसे में सबसे बड़ा संकट ये है कि धान की फसल के लिए पानी आए तो कहां से आए।

किसान परेशान है तो सिंचाई विभाग इश्तेहार का हवाला दे रहा है, जब नर्मदा का पानी 15 मार्च के बाद न देने का एलान हो चुका है और अब पानी लोगों को पीने के लिए मुहैया कराया जा रहा है। ऐसे में खेती के लिए पानी का इंतेजाम खुद करना होगा।

सिंचाई का पानी नहीं क्या करे किसान ?

- जलाशय में प्रति सेकंड 1500 से 2000 क्यूसेक पानी आता है - 9000 क्यूसेक की तुलना में मात्र 4900 क्यूसेक पानी बाहर जाता है - 4300 क्यूसेक नहर के लिए है और 600 क्यूसेक भरूच के लिए है - सिचाईं का पानी बंद होने से पीने के पानी पर दबाव कम हुआ है - फिर भी सरकार सिंचाई के लिए पानी नहीं दे पा रही है