दलितों की पिटाई को लेकर फिर अशांत हुआ गुजरात

भुपेंद्र सिंह, अहमदाबाद (16 अगस्त): गुजरात में अभी पाटीदार आंदोलन पूरी तरह से थमा भी नहीं कि ऊना के दलित उत्पीडन मामले ने गुजरात का माहौल फिर तनावपूर्ण कर दिया है।अहमदाबाद में हुई दलितों की माह रैली के बाद 15 अगस्त को ऊना में दलितों की महारैली तो शांति से संपन्न हो गई, लेकिन रैली के बाद हुई हिंसा ने एक बार फिर देश भर की निगाहें गुजरात की तरफ मोड़ दी है। कल से शुरू हुआ उपद्रव तो शांत हो गया, लेकिन स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

15 अगस्त को अहमदाबाद के वेजलपुर से शुरू हुई दलित अस्मिता यात्रा ऊना पहुंची, जहां दलितों ने महापंचायत कर एक बार फिर हजारों दलितों ने मैला न उठाने और मरे हुए पशु को हाथ ना लगाने की शपथ ली। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद रैली से घर लौट रहे 20 दलितों के एक समूह पर समतर गांव के पास भीड़ ने हमला कर दिया, जिसमें आठ दलित गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस ने भीड़ को भगाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और हल्का लाठी चार्ज भी किया। हालांकि पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनकी मदद के लिए कुछ नहीं किया। पीड़ितों का दावा है कि हमलावर समतर गांव के निवासी हैं। वे लोग पिछले महीने ऊना में दलितों की पिटाई करने की घटना को लेकर गिरफ्तार हुए 12 लोगों का 'बदला' लेना चाहते थे, जबकि कुछ लोगों का ये भी कहना है कि समतर गांव से गुजर रहे दलितों के झुण्ड ने ऐसे उकसाऊ नारे लगाए, जिससे गाववालों का गुस्सा भड़क गया और पथराव के बाद हिंसा फ़ैल गई।

इससे कई लोगों को चोटे आई। इस घटना के 20 पीड़ित भावनगर जिले के हैं और वे साइकिल तथा बाइक से अन्य लोगों के साथ ऊना गए थे। ये लोग जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की उपस्थिति में राधिका वेमुला और बालु सरवैया द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कार्यक्रम में शामिल होने गए थे।

घायलों को भावनगर और राजुला के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इस घटना में चार पुलिसकर्मी और चार अन्‍य लोग घायल हो गए। हिंसा का यह मामला मोटा समधियाला गांव से 10 किलोमीटर दूर हुआ। गौरतलब है कि मोटा समधियाला गांव में ही 11 जुलाई को मरी हुई गाय की खाल उतारने पर सात दलितों की सरेआम पिटाई की गई थी। इस मामले में गिर सोमनाथ पुलिस ने धारा 307 और 120 बी और रायटिंग के तहत 24 लोगों के विरुद्ध एफआरआई दर्ज की और अबतक 20 लोगों को अरेस्ट किया है। जबकि 6 आरोपी अस्पताल में पुलिस की देखरेख में हैं।