जेल से बाहर आएगा हार्दिक पटेल, सरकार परेशान

भूपेंद्र सिंह, अहमदाबाद (13 जुलाई): गुजरात सरकार के नरम रुख के बाद हार्दिक को जमानत मिल गई है और अब 15 तारीख को जेल से बाहर भी आ जायेंगे। लेकिन सरकार की माथे का पसीना अब भी सूखने का नाम नहीं ले रहा। सरकार को चिंता है क‍ि हार्दिक फिर शक्ति प्रदर्शन कर पाटीदारों को बीजेपी से अलग ले जा सकता है। वहीं पाटीदार संगठन भी हार्दिक को गुजरात में रहने के लिए मिले 48 घंटे का एक मिनट भी जाया नहीं करने देना चाहते। पाटीदार समुदाय हार्दिक के निकलते ही महासभा या महारैली की तयारी में है। ऐसे में हार्दिक अब एक बार फिर सरकार के गले की फांस बन सकता है, जिसके विचार से ही सरकार की नींद उड़ी है।

जीएमडीसी ग्राउंड पर ऐतिहासिक सभा देखकर हर नेता हैरान रह गया था। मंत्रीओं और नेताओं का सार्वजनिक समारोहों में जाना मुश्किल हो गया था, जिसके बाद हार्दिक को जेल की सलाखों में धकेल दिया गया था। हालांकि इस बीच सरकार ने आरक्षण आंदोलन को शांत करने के लिए दस फीसदी आर्थिक आरक्षण की घोषणा भी की, लेकिन पाटीदार शांत नहीं हुए है। अब एक बार फिर पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल आज़ाद होंगे और आंदोलन में फिर से जान फुंकने को तैयार करेंगे। हार्दिक के धमाकेदार स्वागत के लिए पाटीदारों ने सूरत में तैयारियां शुरू कर दी है।

सूरत में जगह-जगह हार्दिक के स्वागत में पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, पाटीदार बहुल इलाकों में पोस्टर पर हार्दिक के साथ सरदार पटेल और छत्रपति शिवाजी की तस्वीरें भी लगाई गई हैं। हार्दिक फिलहाल सूरत की लाजपोर जेल में बंद है, वो 15 जुलाई को जेल से बाहर आएंगे। बताया जा रहा है कि हार्दिक की जब रिहाई होगी तो जेल के बाहर ही बड़ी संख्या में पाटीदार समुदाय के लोग उसके स्वागत के लिए जुटेंगे।

जानकारी के मुताबिक़ हार्दिक को खुली जीप में बिठाकर एक बड़ी रैली निकली जायेगी। 15 जुलाई को जेल के बाहर भव्य स्वागत कर हार्दिक सूरत से वड़ोदरा नडियाद होते हुए अहमदाबाद आएंगे और रात अहमदाबाद में ही रुकेंगे। 16 को अहमदाबाद से वीरमगाम अपने घर कुछ देर विश्राम के बाद हार्दिक सौराष्ट्र के कई इलाको का दौरा करेंगे, जहां उनकी बैठक और स्वागत होगा। उसके बाद वो गुजरात छोड़ देंगे। पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के मुताबिक अगर इज़ाज़त मिली तो जेल से बाहर आने के बाद हार्दिक कामरेज इलाके में एक बड़ी जनसभा को संबोध‍ित करेंगे। हार्दिक को 17 जुलाई को गुजरात छोड़ देना है।

ऐसे में गुजरात सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि जिस आंदोलन को शांत करने के लिए उन्हें दिन-रात पापड़ बेलने पड़े। मुख्यमंत्री स्वाबलम्बन योजन घोषित करनी पड़ी। यहां तक की आखिर में 10 फीसदी आर्थिक आरक्षण भी देना पड़ा, कही वो आंदोलन एक बार फिर ज्वालामुखी की तरह फुट न पड़े।