GST कानून में नरमी, 2 करोड़ तक कर चोरी में मिल सकती है जमानत

नई दिल्ली (19 जनवरी): GST सिस्‍टम को विवादों से दूर रखने के लिए केंद्र और राज्यों ने 2 करोड़ रुपए तक की कथित टैक्स चोरी के मामलों में प्रावधानों को नरम बनाने का फैसला किया है। इससे किसी व्यापारी द्वारा की गई 2 करोड़ रुपये तक की कर चोरी में तत्काल जमानत मिल सकेगी। जीएसटी परिषद की पिछली बैठक में फैसला किया गया कि गिरफ्तारी का प्रावधान सिर्फ जालसाजी तथा जुटाए गए कर को सरकारी खजाने में निर्धारित समय में जमा नहीं कराने पर ही लागू होगा।

इसके अलावा अन्य अपराध मसलन गलत 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' या रिफंड लेना, दस्तावेज जमा कराने में विफल रहना आदि में भी गिरफ्तारी नहीं होगी सिर्फ वित्तीय जुर्माना लगेगा। पहले जीएसटी के संशोधित मसौदे में ये अभियोजन के लिए सूचीबद्ध थे। सेवा कर मामले में 50 लाख रुपये से अधिक का कर सरकार के पास जमा नहीं कराने पर गिरफ्तारी का प्रावधान है।

हालांकि, उत्पाद शुल्क कानून में ऐसे डिफॉल्ट की स्थिति में आयुक्त को गिरफ्तारी का प्रावधान लागू करने का अधिकार दिया गया है। पीडब्ल्यूसी के (अप्रत्यक्ष कर) प्रतीक जैन ने कहा कि संशोधित आदर्श जीएसटी कानून के तहत गिरफ्तारी प्रावधान से व्यापारियों को बेवजह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में कम से कम 2 साल के लिए अपराधों के लिए दंड के प्रावधान नरम होने चाहिए क्योंकि जीएसटी एक नई कर व्यवस्था है और व्यापारियों को इस कानून को समझने में समय लगेगा।