GST: हाउसिंग सोसायटी में रहने वालों पर पड़ेगी महंगाई की मार

नई दिल्ली (28 जून): मोदी सरकार 1 जुलाई से जीएसटी लागू कर देगी। जिसके बाद 'एक देश एक टैक्स' की व्यवस्था के तौर पर कुछ चीजों में लोगों को राहत मिलेगी तो वहीं दूसरी तरफ कुछ चीजें महंगी भी होंगी। हालांकि सभी व्यवस्थाओं से लैस हाउसिंग सोसायटी में रहना निश्चित तौर पर आपके लिए महंगा हो जाएगा।


जानें, किस तरह हाउसिंग सोसायटी में रहना होगा महंगा...


बढ़ जाएगा मेंटनेंस चार्ज

यदि आप किसी ऐसी हाउसिंग सोसायटी में रहते हैं, जिसमें आपको मेंटनेंस चार्ज हर महीने 5,000 रुपये अधिक चार्ज देना पड़ता है तो 18 फीसदी टैक्स के लिए तैयार रहिए। फिलहाल सोसायटीज के मेंटनेंस चार्ज पर 15.55% टैक्स देना पड़ता है।


प्रॉपर्टी टैक्स भी भरना होगा

सरकार ने प्रॉपर्टी टैक्स को नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में शामिल नहीं किया है। इसका मतलब यह हुआ कि प्रॉपर्टी मालिक को राज्यों की टैक्स व्यवस्था के तहत सालाना प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराना होगा।


अतिरिक्त चार्ज

नी टैक्स व्यवस्था के तहत सालाना मेंटनेंस चार्जेज के अलावा पानी के बिल आदि पर अलग से टैक्स लगेगा। को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी पानी और बिजली के सप्लायर के तौर पर काम नहीं करती है। इसलिए इन पर जीएसटी लागू नहीं होगा। लेकिन, पहले की तरह ही रेजिडेट्स को इन सेवाओं पर टैक्स चुकाना होगा।


रिपेयर के काम की बढ़ेगी लागत

यदि कोई हाउसिंग सोसायटी मेंटनेंस या रेनोवेशन का काम शुरू करती है तो उसके लिए खरीदे गए सामान जैसे सीमेंट, पेन्ट और स्टील आदि की खरीद पर जो टैक्स लगेगा, वह जीएसटी के तहत जमा टैक्स से घट जाएगा। चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कहा, 'लेकिन यह तभी संभव है, जब रेजिडेंट्स वेलफेयर असोसिशएन अपने इनपुट टैक्स क्रेडिट का पूरा इस्तेमाल करे। रिपेयर फंड पर 18 फीसदी का टैक्स लगेगा।'


बड़ी हाउसिंग सोसायटीज को लगेगा झटका

सालाना 20 लाख रुपये से अधिक के फंड वाली सोसायटीज को जीएसटी के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यदि किसी हाउसिंग सोसायटी का मंथली मेंटनेंस चार्ज 5,000 रुपये से कम रहता है और उसकी मेंबरशिप अधिक होने के चलते सालाना 20 लाख से अधिक का फंड होता है तो उसे भी जीएसटी चुकाना होगा। हालांकि यदि सोसायटी का फंड 20 लाख से अधिक है और 75 लाख से कम तो वह कंपोजिशन स्कीम चुन सकती है।