GST: 1 जुलाई से दवाओं की हो सकती है किल्लत


नई दिल्ली(30 जून): बस कुछ घंटे और देशभर में जीएसटी लागू हो जाएगा। जीएसटी के लागू होने से दवा विक्रताओं को दवाओं की किल्लत होने का डर है। क्योंकि बहुत सी दवाओं के लिए जीएसटी का एचएसएन कोड नहीं अभी तक नहीं आया है। जीएसटी लागू होने के बाद बिलिंग में हर दवा का एचएसएन कोड होगा और उसी के हिसाब से टैक्स लिया जाएगा।


- 1 जुलाई से अन्य उत्पादों की तरह दवाओं पर भी जीएसटी लगाया जा रहा है। जीएसटी में अधिकतर दवाओं पर 12 प्रतिशत टैक्स लगेगा और जीवन रक्षक दवाओं पर 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा।


- जीएसटी के लिए दवाओं का एचएसएन कोड जरूरी होता है। अधिकतर दवाओं के लिए अब तक कोड आया ही नहीं। इनमें वे दवाएं और फ्ल्यूड शामिल हैं जिनका 

आपरेशन में उपयोग होता है इसके अलावा अन्य बीमारियों में डॉक्टर प्रायः रोज प्रेस्क्राइब कर रहे हैं। इनमें फ्ल्यूड्स जैसे डेक्स्ट्रोज, डीएनएस, एनएस शामिल हैं। इसके अलावा एंटीबायटिक सिप्रोफ्लोक्सासिन, ओफ्लाक्सिासिन व बुखार के लिए पैरासिटेमाल व डिहाइड्रेशन होने पर इलेक्ट्रोलायट पाउडर व डायलिसिस फ्ल्युड, आपरेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रोलाइन मेश व स्किन स्टेपलर शामिल है। इनके एचएसएन कोड और टैक्स के बारे में कोई जानकारी दवा विक्रेताओं के पास नहीं पहुंची है।


- जीएसटी में पंजीकृत होने के बाद जैसे ही दवा विक्रेता 1 जुलाई के बाद दवाएं बेचेंगे तो बिल बनाना जरूरी होगा। बिल बनाने के लिए वे जैसे ही फार्मेट खालेंगे कम्प्यूटर एचएसएन कोड मांगेगा। यदि कोड नहीं होगा तो टैक्स भी वे नहीं लगा सकेंगे।