VIDEO: ग्राउंड जीरो से मुसलमानों के पलायन का सच

राहुल प्रकाश, हापुड़ (3 अप्रैल): कैराना के बाद यूपी के एक और जिले में पलायन की खबर गरमा गई है। इस बार हापुड़ से डर के मारे लोगों का पलायन हुआ है। दो समुदाय के लोग जो कभी एक-दूसरे के सुख दुख में शरीक होते थे, आज एक-दूसरे के दुश्मन बन बैठे हैं। इलाके में भारी पुलिस बल  तैनात है। पुलिस ने दो युवकों को इस पूरे मामले में गिरफ्तार किया है।


न्यूज 24 की टीम ने मौके पर जाकर पूरे हालात की सच्चाई को जाना। पुलिस कहती है गांव में किसी को डरने की जरूरत नहीं। सरपंच का भी यहीं कहना है, लेकिन हमारे संवाददाता को हालात कुछ और ही दिखे। पुलिस कहती है कि गांव में हालात सामान्य है। भाईचारा बना हुआ है, घर छोड़कर जा रहे लोगों को डरने की जरूरत नहीं। जिन लोगों ने पीड़ित परिवार के साथ मारपीट की उन्हें जेल भेजा जा चुका है।


सरपंच कहते हैं हिंदू-मुस्लिम इस गांव में पीढ़ियों से साथ रह रहे हैं। गांव के कुछ शरारती लड़कों ने गलत हरकत की और पूरा गांव पीड़ित परिवार के साथ है। गांव के फिलहाल रह रहे मुस्लिम युवकों की भी माने तो इस गांव में हमेशा भाईचारा रहा है। कुछ बदमाश किस्म के लड़कों ने पहनावे को लेकर फसाद किया, लेकिन पूरा गांव उनके साथ है।


पुलिस कहती है गांव में साप्रदायिक तनाव नहीं, मुखिया भी यहीं मानते हैं कि सालों से चला आ रहा भाईचारा भी बना हुआ है। मुस्लिम युवक भी गांव में हिंदुओ और मुसलमानों के बीच अच्छे रिश्तों का बात करते हैं, लेकिन अगर हालात सामान्य हैं तो पुलिस ने य़हां डेरा क्यों डाल रखा है। घर छोड़ कर जाने वाले 7 परिवारों के 40 लोग लौटकर क्यों नहीं आ रहे। उनके परिवार की बहू बेटियां अब भी क्यों डरी हुई हैं। यहां पीड़ित पक्ष में से सिर्फ वो लोग बचे हैं जो अपने पालतू जानवरों की देखभाल के लिए यहां रह गए है। परिवार की औरतों और बच्चों को उन्होंने रिश्तेदारों के घर भेज दिया है।


गांव के कुछ उत्पाती लड़कों ने गुंडागर्दी की कोशिश की। एक परिवार के घर में घुसकर उनकी पिटाई की। घर की महिलाएं जब उन्हें बचाने आई तो उनपर भी हाथ छोड़ा गया। भले ही पुलिस, प्रशासन और खुद गांव वाले माहौल सामान्य होने की बात कह रहे हो, लेकिन इन घरों पर लटके ताले, उनके चेहरों का खौफ कोई और कहानी बयां कर रहे हैं। गांव में हुए बवाल के बाद पीड़ितों के मोहल्ले में दो पुलिसकर्मी तैनात हैं, जोकि लोगों को सुरक्षा का आश्वासन दे रहे हैं। लेकिन लोगों को इनके आश्वासन पर विश्वास नहीं।


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