क्या हुआ जब अरबों साल पहले टकराए थे दो ब्लैक होल...

नई दिल्ली (12 फरवरी): क्या आप जानते हैं कि ब्लैक होल क्या होता है, ये पहली बार कब टकराए और जब टकराए तो अंतरिक्ष में क्या हुआ। हम ये बातें इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इन सभी सवालों के जवाब पर मूहर लग गया है। वैज्ञानिकों ने ग्रैविटेशनल तरंगों की खोज कर ली है। 

कितनी अहम है यह खोज वैज्ञानिक इस खोज को सदी की सबसे बड़ी कामयाबी बता रहे हैं। वैज्ञानिक ग्रैविटेशनल तरंगों को देखने की कोशिश में काफी पहले से लगे हुए थे। इसके लिए एक खास तरह का स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा था। यूरोप के स्पेस एजेंसी के इस अंतरिक्षयान के द्वारा ही अल्बर्ट आइंस्टीन की भविष्यवाणी सच साबित हुई है।

क्या थी आइंस्टीन की भविष्यवाणी महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने 100 साल पहले ही ग्रैविटेशनल तरंगें के होने की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा था कि सवा अरब साल पहले दो ब्लैक होल में टक्कर हुई थी। यह इतनी जोरदार थी कि अंतरिक्ष में उथल-पुथल हो गया। कई स्थान इधर से उधर हो गए। यही नहीं समय तक बदल गया। इस टक्कर के बाद आइंस्टीन ने कहा था कि इसका असर एक जगह पर सिमित नहीं रहता बल्कि तालाब में पानी की लहरों की तरह यह भी फैलता है।

इन तरंगों की खोज ने न सिर्फ आइंस्टाइन की भविष्यवाणी को सच साबित किया है बल्कि खगोलविदों को उत्साह से भर दिया है क्योंकि इससे ब्रह्मांड को समझने के नए रास्ते खुल गए हैं। इस थ्योरी के अनुसार ग्रैविटेशनल तरंगें ब्रह्मांड में बिना किसी रुकावट के विचरण करती हैं।

पीएम मोदी ने की भारतीय वैज्ञानिकों की भूमिका की सराहना उधर, इन तरंगों की खोज से संबंधित परियोजना में भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की है। उन्होंने ट्वीट किया, 'अत्यधिक गर्व है कि भारतीय वैज्ञानिकों ने इस चुनौतीपूर्ण खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।' गौरतलब है कि भारतीय वैज्ञानिकों ने इस खोज में डेटा अनैलिसिस समेत काफी अहम भूमिकाएं निभाई हैं।

ग्रैविटेशनल तरंगों की खोज के लिए  इंस्टिट्यूट ऑफ प्लाज्मा रिसर्च. गांधीनगर, इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रॉनामी ऐंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे और राजारमन सेंटर फॉर अडवांस्ड टेक्नॉलाजी, इंदौर सहित कई संस्थान इससे जुड़े थे।

क्या होता है ब्लैक होल

ब्लैक होल वास्तव में कोई छेद नहीं है, यह तो मरे हुए तारों के अवशेष हैं। करोड़ों, अरबों सालों के गुजरने के बाद किसी तारे की जिंदगी खत्म होती है और ब्लैक होल का जन्म होता है। यह ब्लैक होल ग्रह, चांद, सूरज समेत सभी अंतरिक्षीय पिंडों को अपनी ओर खींचता है। जितने ज्यादा पदार्थ इसके अंदर आते हैं इसका आकर्षण बढ़ता जाता है। यहां तक कि यह प्रकाश को भी सोख लेता है।