बिहार: ASI ने खोज निकाला ग्रांड ट्रंक रोड, जानें इसका इतिहास

नई दिल्ली ( 6 मार्च ): दक्षिणी एशिया के सबसे पुराने व सबसे लंबे राजमार्ग के तौर पर जाने जाने वाला ग्रांड ट्रंक रोड मिल गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(एएसआइ) ने इस रोड का करीब चार किलोमीटर का हिस्सा बिहार के सोन नदी में खोजकर निकाला है। यह रोड 18 फुट चौड़ी है। आज से करीब 500 वर्ष पहले इसका निर्माण शेरशाह सूरी ने करवाया था। इस खोज से एएसआइ उत्साहित होकर अब इस संबंध में शोध कराने की तैयारी में है।


दो सदियों से अधिक काल के लिए इस मार्ग ने भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी एवं पश्चिमी भागों को जोड़ा। यह हावड़ा के पश्चिम में स्थित बांगलादेश के चटगांव से प्रारंभ होता है और लाहौर (पाकिस्तान) से होते हुए अफगानिस्तान में काबुल तक जाता है।


पुरातत्वविद् शंकर शर्मा ने कहा कि ग्रांड ट्रंक रोड के बारे में लोग अक्सर पढ़ते और सुनते आए हैं। मौजूदा समय में इसे जीटी रोड के नाम से भी जानते हैं लेकिन अभी तक इसके मूल स्वरूप को किसी ने नहीं देखा था। अब इस ऐतिहासिक राजमार्ग को बिहार के सोन नदी से मूल स्वरूप में देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले साल आई बाढ़ के कारण इस रोड के ऊपर जमी रेत हटी, जिसके बाद इसका पता चला। यहां का निरीक्षण व शोध करने पर इसके वास्तविक प्रमाण सामने आए। रोहतास और औरंगाबाद जिले के बीच बहने वाली सोन नदी में 18 फुट चौड़े पत्थरों से निर्मित पुल को साफ देखा जा सकता है। अब इसके और वास्तविक रूप की खोज की जा रही है।


ग्रांड ट्रंक रोड का निर्माण शेर शाह सूरी ने किया था। यह मार्ग हावड़ा के पश्चिम में स्थित बाग्लादेश के चटगांव से शुरू होकर लाहौर (पाकिस्तान) से होते हुए काबुल तक जाता है। पुराने समय में इसे, उत्तरपथ, शाह राह-ए-आजम, सड़क-ए-आजम और बादशाही सड़क के नामों से भी जाना जाता था। यह मार्ग, मौर्य साम्राज्य के दौरान अस्तित्व में था।