मोदी सरकार का कड़वा फैसला, जीवन देने वाली 74 दवाएं होंगी महंगी

विनोद जगदाले/संजीव त्रिवेदी, नई दिल्ली (8 फरवरी): यह खबर आपकी सेहत, आपकी जेब, आपकी जिंदगी से जुड़ी हुई। जीवन रक्षक दवाएं यानी वो मेडिसिन जो किसी की जिंदगी बचाने के काम आती हैं, लेकिन उन्हीं में से 74 दवाएं अब मोदी सरकार के एक फैसले की वजह से महंगी होने जा रही है। इनमें कैंसर, एड्स, हीमोफीलिया जैसी 74 बीमारियों के दवाओं के नाम हैं।

सरकार ने इन दवाओं के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी में छूट वापस ले ली है, जिससे इनकी कीमतें खासी बढ़ सकती हैं। सरकार के इसी फैसले का असर देश के लाखों-करोड़ों मरीजों पर सीधे पड़ने वाला है। जो कैंसर के लिए, एड्स के लिए और हीमोफीलिया जैसी बीमारियों में जीवन रक्षक दवाओं के आसरे सांस लेते हैं। हीमोफीलिया ही नहीं सरकार के फैसले की वजह से और किन बीमारियों की दवाएं महंगी होंगी वो भी जान लीजिए।

महंगी होंगी यह दवाएं: किडनी स्टोन, कैंसर कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी, दिल की गंभीर बीमारियों, डायबिटीज, पर्किंसन, बोन डिसीज, इन्फेक्शन में काम आने वाले एंटीबायोटिक्स दवाएं भी महंगी होंगी। इसके अलावा बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण, ल्यूकेमिया, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, एलर्जी, गठिया, अल्सर वाले कोलाइटिस की कुछ दवाओं पर भी इसका असर पड़ेगा।

जीवन रक्षक दवाओं पर अचानक आए इस फैसले की वजहें सरकार नहीं बता रही, लेकिन हमें मिली जानकारी के अनुसार इस फैसले के पीछे सरकार की मंशा उन सभी दवाओं के विकल्प भारत में ही तैयार करने की है। मतलब 'मैक इन इंडिया' को बढ़ावा। लेकिन स्वास्थ्य और सरकार की प्राथमिकताओं के इस घालमेल में सरकार फंसती हुई दिख रही है, क्योंकि फैसले पर सवाल उठाने वालों में विरोधी ही नहीं, अपने भी हैं।

सरकार के अपनों ने उठाए सवाल: हीमोफीलिया जैसी जानलेवा बीमारी का तो भारत में कोई विकल्प ही उपलब्ध नहीं है। जाने-माने चिकित्सक और पिछली एनडीए सरकार में देश के स्वास्थ मंत्री रहे बीजेपी नेता सीपी ठाकुर को भी ये फैसला अटपटा लगा। सीपी ठाकुर खुद मानते हैं कि सरकार को पहले सस्ता विकल्प तैयार करना था, फिर जीवन रक्षक दवाएं महंगी करने का फैसला लेते।

विपक्ष ने इस फैसले की खामियों को लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान के इशारे पर सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने वित्तमंत्री अरुण जेटली को खत लिखकर सवाल उठाया है कि एक तरफ तो सरकार को कच्चे तेल की कीमतों की वजह से जबरदस्त फायदा हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ लोगों पर अब महंगी दवा का बोझ भी बढ़ाया जा रहा है।  

देश में इस वक्त करीब एक करोड़ कैंसर पीड़ित हैं और औसतन 10 लाख कैंसर के रोगी हर साल बढ़ जाते हैं। लेकिन इन आंकड़ों के बीच सरकार का ये फैसला तब आया है, जब मांग आगामी बजट में हेल्थ बजट बढ़ाने की है।